मजाकिए लहजे में नव निर्मित कॉकरोच जनता पार्टी भागवत और मोदी की नींद उड़ा दी, सिर्फ़ 24 घंटा में शिक्षामंत्री इस्तीफा नहीं दिया तो कल देश में नये तूफान का आगाज़ होगा

डीके अकेला के कलम से

आज पूरे देश में कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा पहली पायदान पर है।मजाकिए लहजे में नव निर्मित कॉकरोच जनता पार्टी आज देश में दावा नल का स्वरूप ग्रहण करते चला जा रहा है। काकरोच जनता पार्टी के गठन और दिल्ली जंतर मंतर से तकरीबन एक करोड़ छात्र युवाओं के जिंदगी के साथ अनैतिक क्रूर खिलवाड़ करने वाले शिक्षामंत्री के इस्तीफा की मांग को लेकर घोषित आंदोलन के कार्यक्रम से के केंद्र सरकार बेहद व्यग्र,बेचैन और व्याकुल हैं। आरएसएस वो बीजेपी का दम फूल रहा है।
विदित हो कि मजाकिया तौर पर मूड में पगठित नव निर्मित कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे छिपी रहस्य व पृष्ठभूमि पर ज़रा दिल से गौर करें। सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने अपने एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान छात्र युवा बेरोजगारों की तुलना कॉकरोच से कर दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि नौकरी से बंचित युवा बेरोजगार कुछ मीडिया से, कुछ एनजीओ से, कुछ मानवाधिकार संगठनों से और कुछ अन्य जन संगठनों से जुड़कर सरकार पर सिर्फ़ हमले करने ही मुख्य पेशा बना लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत की यह टिप्पणी से पूर्ण खिन्न व दुःखी होकर अमरीका में रह रहे भारतवंशी अभिजीत दीपके ने सूर्यकांत के टिप्पणी पर सिर्फ टोन मारने खातिर मजाकिया मूड ही में कॉकरोच जनता पार्टी नामक नव निर्मित संगठन की घोषणा कर दी। इसे इंटरनेट पर वायरल भी कर दिया गया। इसके संस्थापक शिक्षाविद् अभिजीत दीपके ने कहा कि हमने तो इसे मज़ाक की लहजे में बड़े हल्के सा लिया था। लेकिन, कॉकरोच जनता पार्टी नामक संगठन की घोषणा होते ही मात्र एक सप्ताह के भीतर क़रीब 4 मिलेनियम फॉलोवर हो चुके हैं। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरकर देश में 70 लाख से अधिक लोग पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। पार्टी में शामिल होने वाले शिक्षित बेरोजगार युवकों का तांता लगा हुआ है। 17 से 30 वर्ष के युवाओं की 60% से अधिक है।अभिजीत दीपके ने कहा कि यह सब वह मेरे लिए एक अद्भुत विचित्र दृश्य था, जिसे देखकर मैं आश्चर्य चकित हो गया। देश के एक करोड़ छात्र युवाओं की जिंदगी से हो रहे क्रूर अमानवीय मज़ाक के खिलाफ हमें सड़क पर उतरना चाहिए।शांतिपूर्ण जनतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना ही एक मात्र विकल्प है। इसे व्यवहारिक अमलीजामा पहनाने के लिए कल 6 जून से देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर से प्रथम ज़मीनी जनांदोलन का शंखनाद होने जा रहा है, जिसमें क़रीब लाखों लोग उपस्थित रहेंगे।
कल दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी ने तीन युवाओं को राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित कर पहली एक महती प्रेस वार्ता आयोजित की गई । तीन राष्ट्रीय प्रवक्ता में मुख्य रूप से 1. सौरभ दास जो वरिष्ठ मीडिया कर्मी 2. विजिता भैया प्रसिद्ध लेखक और फिल्म मेकर तथा 3. आशुतोष कुमार शिक्षाविद् थे।अपने प्रेस वार्ता के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी की सम्पूर्ण आंदोलन के रूपरेखा और अपनी दशा और दिशा के साथ अर्थ व्यवस्था का भी खुले खुलासा विस्तार पूर्वक किया।सत्तापक्ष को बहुत झकझोर कर रख दिया। मोदी और शाह की नींद हराम हो गई है। इस प्रेस वार्ता में तो सोनम वांगचुंग का शामिल होने का भी मतलब कुछ और है। यह सोने में सुहागा डाल देने का काम किया है।वांगचुंग ने कहा कि कल 6 जून को 8 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर कॉकरोच जनता पार्टी के युवा जन्मदाता अभिजीत दीपके के आगमन के सुनहले मौके पर भव्य स्वागत एवं गर्मजोशी भरा अगवानी की जाएगी।
अभिजीत दीपके का दिल्ली आगमन के उपरांत दिल्ली पार्लियामेंट्री थाने समर्थकों के साथ जाकर 6 जून को निर्धारित घोषित कार्यक्रम का वैधानिक रूप से इजाजत लेकर सफल बनाना प्राथमिक कार्य भार है। उक्त घोषित कार्यक्रम से केंद्र सरकार जरूरत से ज्यादा आखिर हड़कंप क्यों हो चुकी है ? देश के एक चर्चित हस्तियों में बेशुमार सोनम वांगचुंग ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि अब मात्र बचे 24 घंटा के दौरान एक करोड़ छात्रों जिंदगी को मिट्टी में पलीद कर देने वाले भ्रष्ट बेशर्म शिक्षामंत्री का इस्तीफ़ा नहीं दिया तो देश में भूचाल व तूफान खड़ा हो जाएगा। जनयुद्ध की रणभेरी देश में धधक उठेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तो यहां तक शंका जताई है कि भारत पहुंचते ही घबराहट की दौर से गुजर रही सरकार मेरी गिरफ्तारी भी कर सकती है।पर, इसका मुझे कोई डर,भय और परवाह नहीं है।इसके बावजूद मैं भारत आ रहा हूं और आंदोलन शांतिपूर्ण जनतांत्रिक तरीके से सफल बनाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। अब देखना यह है कि कल 6 जून का दिन काफी ऐतिहासिक साबित होगा। कल अगर कॉकरोच जनता पार्टी के जन्मदाता अभिजीत दीपके को गिरफ्तार कर घोषित कार्यक्रम को सैन्य बूटों के तले कुचलने या प्रतिबंधित करने से कॉकरोच जनता पार्टी काफी हाईलाइट हो जाएगी। जितना घाटा होगा, उससे कई गुना अधिक फायदा होगा।वहीं, केंद्र में सुशासन और कानून की राज वाली एनडीए सरकार की ढोल की पोल खोल दी जाएगी। देश में लगभग एक करोड़ युवाओं के अंदर धधक रहे नफरत के शोले विरोध की सुलगती चिंगारी की जद, लपेटे एवं आगोश में पूरे देश को आ जाने से दुनिया की अब कोई भी ताकत न रोक पाएगी। कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों हाथों में मानो लड्डू है। कार्यक्रम को नहीं होने पर सरकार की छवि की बदनामी होगी । तानाशाही दमनात्मक चरित्र बिल्कुल बेपर्द हो जाएगी। पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाएगा। यदि कार्यक्रम निर्विवाद रूप से सफ़ल हो गया तो सांगठनिक सुदृढ़ीकरण की गति युद्धस्तर पर धारण कर लेगी। साथ ही, जन आंदोलन की बाढ सी आ जाएगी और भारत में भी नेपाल जैसी घटी परिघटना की कहीं पुनरावृति नहीं हो जाय, यह भी कहना बड़ा मुश्किल है। वास्तव में यहां राख के नीचे आग की शोला सुलग रही है।