महापंचायत में जंग- ए -ऐलान से शासन – प्रशासन को उड़ी नींद


केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा


भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर को सर्व समाज ने पुलिस द्वारा सरकार के बड़े आंका के इशारे पर हत्या करने का न सिर्फ आरोप लगाया जा रहा है बल्कि हत्या में शामिल पुलिस तथा सरकार के आंका को अविलम्ब सज्जा दिलाने के लिए महापंचायत का आयोजन भरत तिवारी के जन्मस्थली

भोजपुर जिला अंतर्गत साहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में किया गया। महापंचायत में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बंगाल सहित देश के अन्य भागों से हजारों के तायदाद में लोगों का भागेदारी रहा। महापंचायत में मौजूद लोगों का आक्रोश आसमान में था। भरत तिवारी के चचेरे भाई ने महापंचायत में बिहार पुलिस के नौकरी छोड़ने और भरत तिवारी को न्याय के लिए निर्णायक आंदोलन छेड़ने का जंगे- ए ऐलान कर शासन- प्रशासन को बेचैनी बढ़ा दी है। कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर न्याय नहीं मिला तो निर्णायक जंग छेड़ेंगे और न्याय हासिल करेंगे। महापंचायत में जनसुराज पार्टी के सुत्राधार प्रशांत किशोर ने भी न्याय मिलने तक जनसंघर्ष तेज़ करने का ऐलान करते हुए सरकार तथा सरकार के मुखिया को खुब खरी खोटी सुनाया। महापंचायत में उमड़े जनसैलाब यह गवाही दे रहा है कि भरत तिवारी कोई गुंडा मवाली या अपराधी नहीं बल्कि एक सुलझा हुआ समाजिक कार्यकर्ता था। लेकिन सत्ता के भ्रष्ट ब्यवस्था ने उसे शहीद होने के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। सड़क नाली गली पेयजल व विस्थापितों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघर्षरत तथा भ्रष्ट ब्यवस्था के लिए मुखर आवाज बुलंद करना सरकार को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था। सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के कुंठीत मानसिकता से ग्रसीत होकर पुलिस द्वारा उसे हत्या करवा दी। घटना के बाद पुलिस को निलम्बित कर तथा फिर प्राथमिकी दर्ज कर यह सिद्ध कर दिया है कि भरत तिवारी के एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या हुई है। सम्राट सरकार ने जनाक्रोश को देखते हुए आनन फानन में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से न्यायिक जांच कराने की घोषणा भी कर दी है। लेकिन पीड़ित परिजनों एवं शुभचिंतकों का निश्चित समय सीमा के अंदर न्याय दिलाने का मांग है जो जायज है। चुके विलम्ब से न्याय मर जाता है यह भी सच्च है। महापंचायत में मोजूद लोगों ने कहा कि भरत तिवारी दलित, पिछड़ों के लिए ही संघर्ष कर रहा था लेकिन कुछ मुट्ठी भर जाती वादी मानसिकता के लोगों द्वारा अन्याय के खिलाफ ऊपजे जनाक्रोश को जाती धर्म के उलझनों में फंसाकर दोषियों को मददगार साबित हो रहे हैं या फिर अपने राजनैतिक दुकानदारी पर खतरा महसूस कर रहे हैं इसलिए हो हल्ला मचा रहे हैं जो किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।