डीके अकेला खबर सुप्रभात समाचार सेवा
पूरे देश में और खासकर बिहार राज्य में प्रतिशोधात्मक राजनीति की आज सुनामी बाढ़ आ चुकी है। सरकारी बंगले का विवाद बर्चस्व और मूंछ की लड़ाई में तब्दील हो गया है। सरकारी नियम एवं प्रावधान को यहां सीधे ठेंगा दिखा दी गई है। बिहार में अब संवैधानिक मर्यादा की मटिया प्लीध कर दी सरकारी प्रावधान ने कर दी है।पक्ष और विपक्ष की तलवारें एक दूसरे की गर्दन को मर्दन कर देने को व्याकुल, बैचेन व बेहद व्यग्र हैं।पक्ष और विपक्ष के विरोध का घोर आलोचनाओं की गर्म बाजार दोनों तरफ से काफी मर्माहृत व चर्चित कर देने वाली है। यह कितनी हास्यास्पद और निकृष्ट अनुमानित तथ्य तथा के साथ काफी संवेदनशील हैं। यह एक जीता जागता प्रखर प्रमाण है कि संघर्ष की परिणति ही परिणाम होता है । यहां की
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच उत्पन्न यह मूंछ और वर्चस्व की विवाद का पूर्णतः है। यह पूर्णतः सरकार प्रायोजित है। सत्ता और पावर का यह अद्भुत नजारा है।यहां यह एक घोर अवसरवादी एवं जातिवादी निजी वर्चस्व को स्थापित करने का एक नापाक हरकतों के पीछे छिपे काली करतूतें की जगजाहिर कड़वी हकीकत का एक विशुद्ध नजारा है। यह बेहद संगीन और काफ़ी विचारणीय मसला है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डंके की चोट पर यह ऐलानिया खुलेआम घोषणा कर दिया है कि बिहार के सरकारी आवास किसी के बाप की कोई खानदानी जागीर नहीं है। मुख्य मंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक लहजे में साफ़ कहा कि बिहार सरकार की संपत्ति किसी की बपौती नहीं ,बल्कि यह बिहार की जनता की पुस्तैनी अमानत है।उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को चिंता रहती है कि हमारा घर बचा रहे। बेटा और माता को सिर्फ अपने आवास की चिंता है। जनता की बुनियादी मूलभूत सुविधाओं एवं समस्याओं से इन्हे कोई लेना- देना ही नहीं है। इन्हें मात्र माता- पिता और बेटा को अलग -अलग आवास व सुरक्षा और निर्धारित सुविधाएं की दृष्टिकोण से ठोस कानूनी सम्मत स्थाई समाधान चाहिए। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की ओर से जो आपको जो घर मिला है, उसमें आप हमेशा बरकरार रहिएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यहां यानि बिहार में अब लोकतंत्र है और संवैधानिक वसूलों और नियम- कानूनों का पालन अब सबको ही करना पड़ेगा। आवास तो इन्हें किसी भी कीमत पर खाली ही करना होगा।
नियम एनडीए सरकार के नेताओं पर भी लागू होना चाहिए या नहीं ? क्या नियम विपक्ष के लिए ही सुरक्षित है ? अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार से सवाल किया कि उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित 05 ,देशरत्न मार्ग को एक अन्नने मार्ग में आखिर क्यों मिलाया गया. इसके पीछे छिपे क्या राजनीतिक मूल कारण हैं ? 2019 में पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार ने लिखित में बताया था कि यह बंगला उप मुख्यमंत्री के नाम से आबंटित है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन, 03 टेलर रोड में किस दृष्टिकोण और हैसियत से रह रहे हैं ? तरैया के विधायक जनक सिंह, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, पूर्व मंत्री राजू सिंह, विधायक करणजीत सिंह, विधायक मनोरमा देवी, पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार मंटू, सांसद संजय झा को एम स्टैंड रोड 2023 से ही आबंटित है। आयोग के कितने सदस्यों को विपक्षी विधायकों से बड़ा आवास दिया गया है, जिसकी सूची सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
राबड़ी देवी वरिष्ठ नेत्री हैं, उन्हें सरकारी नियमों का सम्मान करते हुए उनका अनुपालन करना चाहिए। सत्ता पक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए यह नियम प्रतिबंधित नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए सुरक्षित है।


