राष्ट्र सशक्त तो उसकी राष्ट्रभाषा भी सशक्त !
गाजियाबाद से निर्मल शर्मा का आलेख _जब तक कोई देश,वहाँ के रहने वाले लोग और वहाँ का समाज समृद्धिशाली और ताकतवर नहीं होता है,तब तक उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा भी शक्तिशाली और समृद्ध नहीं हो सकती है।_* _उदाहरणार्थ 19 वीं सदी में गरीबी से त्रस्त रूस में फ्रेंच भाषा बोलनेवालों को ही वहां
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