केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
देश में दलित समुदाय को सुरक्षा के ख्याल से एससी-एसटी एक्ट बनाया गया था। उम्मीद था कि यह एक्ट दलितों को सुरक्षा प्रदान करेगा और तब समाज में दलित समुदाय के लोग भी शर उठाकर सम्मान के साथ अपना जीवन यापन करेंगे तथा देश के संसाधनों पर अपना बराबरी का दावा करेंगें। लेकिन आज एससी-एसटी एक्ट का जो हलात है उससे समाज के सभी वर्गों के लिए चिंता का विषय है। जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में एससी-एसटी एक्ट के तहत 247,000 मामले दर्ज हुए। इनमें मात्र 20,210 अपराध साबित हुआ जबकि 34,300 मामले झुठ पाये गये।अब सवाल यह उठता है कि आखिर तेजी से एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज झुठे मुकदमों के लिए जिम्मेवार कौन है? जिन लोगों ने एससी-एसटी एक्ट का दुरपयोग कर रहे हैं और और समाज में विषाक्त वातावरण तैयार कर रहे हैं तथा एससी-एसटी वर्ग के गरीब व असहाय लोगों को बली का बकरा बना रहे हैं इसके पिछे मकसद क्या है? जाहिर है ऐसे लोग अपना तीजोरी भरने और अपना चेहरा चमकने के लिए अपने ही समाज के गरीब व असहाय लोगों को बली का बकरा बना रहे हैं।इस लिए ज़रुरत है वैसे लोगों को समाजिक वहिष्कार करने और चेहरे से नक़ाब उतारने के लिए समाज में जागृति अभियान चलाने का। नहीं तो ऐसे लोग दलित होते हुए भी दलितों के ही ग़रीब और लचार लोगों को बली का बकरा बनाते रहेंगे और अपना उल्लू सिधा करते रहेंगे। चुके ऐसे लोगों को चिंता न तो समाज और नहीं देश का है। इन्हें चिंता सिर्फ और सिर्फ है तो अपने जेब का विकास करना अपना परिवार को खुशहाल रखना और इसी के लिए एससी-एसटी एक्ट का दुरपयोग करना।


