गुरुआ विधायक डॉ० उपेन्द्र प्रसाद ने बोध गया विधायक कुमार सर्वजीत पर लगाया गंभीर आरोप

खबर सुप्रभात समाचार सेवा

बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत द्वारा गुरुआ विधानसभा क्षेत्र के विकास और महादलित बस्तियों को लेकर दिए गए बयान उनकी राजनीतिक हताशा और सच्चाई से भागने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि गुरुआ के विधायक ने महादलित टोलों में सड़क और नाली निर्माण के लिए “डेढ़ किलो (1.5 kg) की

डॉ उपेन्द्र प्रसाद, विधायक गुरुआ

फाइल” सौंपी है। कुमार सर्वजीत शायद यह भूल गए कि वह फाइल का वजन तौलने के बजाय उस फाइल के पीछे छिपी गुरुआ के वंचितों की पीड़ा को तौलते, तो उन्हें अपनी ही पार्टी (राजद) के पूर्व विधायक के पांच साल के कार्यकाल की विफलता नजर आ जाती। डेढ़ किलो की फाइल कागजी पुलिंदा नहीं, पूर्व विधायक की उपेक्षा का दस्तावेज है कुमार सर्वजीत जी को यह समझना चाहिए कि जब किसी क्षेत्र की उपेक्षा वर्षों तक की जाती है, तो वहां की समस्याओं की सूची भारी ही होगी। गुरुआ के महादलित टोलों में सड़क और नाली की यह मांग कोई नई नहीं है; यह वही काम है जिसे 2020 से 2025 तक गुरुआ के तत्कालीन राजद विधायक विनय कुमार यादव ने ठंडे बस्ते में डाल रखा था।
यदि पूर्व विधायक ने अपने कार्यकाल में गुरुआ के गरीब, शोषित और महादलित बस्तियों में विकास की एक भी ईंट ईमानदारी से रखी होती, तो आज हमें उनके अधूरे और उपेक्षित कार्यों की इतनी लंबी सूची सरकार के समक्ष नहीं रखनी पड़ती। यह फाइल वजन में भारी इसलिए है क्योंकि इसमें पूर्व विधायक की पांच साल की नाकामियों का पूरा हिसाब दर्ज है।
विधानसभा में पूर्व विधायक विनय यादव ने क्या किया?
कुमार सर्वजीत जी दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपनी पार्टी के पूर्व विधायक विनय यादव से यह सवाल क्यों नहीं पूछते:
सदन में चुप्पी: पिछले पांच वर्षों में राजद के विधायक ने विधानसभा में गुरुआ के महादलित टोलों के बुनियादी विकास, पक्की सड़कों और जल निकासी के लिए कितनी बार आवाज उठाई?
फंड का आवंटन: विधायक ऐच्छिक कोष और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गुरुआ के कितने महादलित गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ा गया?
जमीनी हकीकत: जमीनी हकीकत यह है कि चुनावी वादों के अलावा जमीनी स्तर पर महादलित समाज को केवल वोट बैंक समझकर छोड़ दिया गया।
जाति विशेष की राजनीति और विकास में पक्षपात की सच्चाई
गुरुआ की जनता इस बात की गवाह है कि पिछले पांच सालों में विकास योजनाओं के चयन में किस तरह का भेदभाव बरता गया। पूर्व विधायक के कार्यकाल में विकास कार्य केवल चुनिंदा बस्तियों और खास जाति वर्ग के प्रभाव वाले इलाकों तक ही सीमित रहे।
महादलित टोलों के साथ सौतेला व्यवहार: जहां अन्य प्रभुत्व वाले इलाकों में सड़कें और पक्की नालियां बनाई गईं, वहीं दलित-महादलित टोलों को कीचड़ और जलजमाव में जीने के लिए छोड़ दिया गया। समान विकास की कमी: लोकतंत्र में प्रतिनिधि पूरे क्षेत्र का होता है, किसी एक जाति या वर्ग का नहीं। पूर्व विधायक की इसी पक्षपाती राजनीति और जातिवादी प्राथमिकताओं के कारण गुरुआ के महादलित और पिछड़े इलाके विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर रहे।
हमारा संकल्प: बिना भेदभाव हर वर्ग तक पहुंचेगा विकास
डॉ. उपेंद्र प्रसाद का स्पष्ट संदेश है कि गुरुआ की जनता ने बदलाव और न्याय के लिए जनादेश दिया है। हम फाइल का वजन देखकर काम नहीं रोकते, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचाना हमारा दायित्व है।
बोधगया विधायक को दूसरों के क्षेत्र में गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने और फाइलों का मजाक उड़ाने के बजाय यह आत्ममंथन करना चाहिए कि उनकी पार्टी के नेता जब सत्ता और पद पर थे, तब उन्होंने गरीबों और वंचितों के हक के साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों किया। गुरुआ में अब ‘तुष्टीकरण और पक्षपात’ का दौर समाप्त हो चुका है; अब हर महादलित बस्ती, हर गांव और हर टोले में बिना किसी भेदभाव के पक्की सड़क और नाली का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।