नई दिल्ली संवाद सूत्र ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पिछले सप्ताह देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार तथा असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल सरकारों से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कई अंतरिम निर्देश भी जारी किए। अदालत ने विशेष रूप से आदेश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल एंटीसिडेंट) नहीं है और जिन्हें केवल प्रदर्शन में भाग लेने के कारण गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड तथा पीसीआर लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। इसके अलावा, अदालत ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए तथा फिलहाल उसे सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी या पहचान संबंधी विवरण किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं किए जाएं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने के कारण कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई (कोर्सिव स्टेप्स) न की जाए। शुरुआत में कोर्ट ने आदेश दिया था कि 18 वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, उन्हें रिहा किया जाए। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि हिरासत में लिए गए कुछ छात्र 19 और 20 वर्ष की आयु के भी हैं। इस पर अदालत ने अपना निर्देश स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन भी छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें उनकी आयु की परवाह किए बिना रिहा किया जाए।


