केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
बिहार में सुशासन और कानून का राज होने का ढिंढोरा पीटने वाले आज बतायेगें की आख़िर भोजपुर (आरा ) के साहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव के युवक को पुलिस हत्या कर दी या फिर एनकाउंटर में मारे जाने का सवाल देश में राजनैतिक गलियारों से लेकर शहर, कस्बों से लेकर गांव के चौक चौराहों पर बहस छिड़ी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर तमाम मीडिया हेड लाइन बना रखा है। कोई भारत तिवारी को अपराधी तो कोई सुंदर समाज के लिए ब्यवस्था में खामियों को उजागर करने और हक़ हुकूक के लिए संघर्षरत युवक के रुप में देख रहा है। लेकिन एक सवाल है उन लोगों से जिन्होंने भरत तिवारी को अपराधी बता रहे हैं तो क्या वे बता सकते हैं कि भरत तिवारी पुलिस पर पीस्टल से कितना राउंड फायरिंग किया यदि नहीं तो फिर अपराधी कैसे? क्या यह भी बता सकते हैं कि भरत तिवारी पर हत्या, बालात्कार, लूट जैसे कोई संगीन आरोप है यदि नहीं तो अपराधी कैसे ? क्या भरत तिवारी अपने और अपने परिजनों के लिए कुछ मांग रहा था यदि नहीं तो फिर यह सब केवल बकवास और हर मामले में जात- धर्म और क्षेत्र के नाम पर नफरत फ़ैलाने वाले चाहे जो भी हो क्या वे अपराध नहीं तो और क्या कर रहे हैं? जहां तक हाथ में हथियार लेकर पुलिस से आंख में आंख डालकर यदि सवाल कर रहा है तो आखिर इस परिस्थिति के लिए क्या ब्यवस्था जिम्मेवार नहीं है ? क्या विस्थापितों को सरकार से सुविधा के लिए और विस्थापितों को हक अधिकार के लिए यदि गुहार लगा रहा था तो क्या आप बता सकते हैं कि विस्थापित परिवार भरत तिवारी के रिश्तेदार था या उसके जात बिरादरी या फिर कोई अन्य सवर्ण समाज के लोग थे? नहीं तो फिर तथा कथित एनकाउंटर, लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला और पुलिसिया गुंडागर्दी और मनमानी के विरुद्ध आम गोले बंदी और होने वाले विरोध प्रदर्शन को कमजोर करने के सोची समझी रणनीति व षड्यंत्र के तहत जातीयता का जहर फैलाने वाले लोग आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं और कैसा समाज और राज्य बनाना चाहते हैं ? क्या यह तो नहीं चाहते हैं कि समाज को जाती धर्म भाषा और क्षेत्र के नाम पर बांट दो और चांदी के चमच से सत्ता के मलाई चाहते रहें? और आज इसमें कुछ लोग सफल भी हो रहे हैं लेकिन क्या इतिहास उन्हें माफ़ करेगा या फिर कब्र में हमेशा -हमेशा के लिए सुला देगा यह भी आने वाला वक्त बताएगा। देश आज जानना चाहता है कि पिछले दिनों बेगूसराय जिले में पति के सामने पत्णी को सामुहिक बालात्कार , राजगीर में दो दलित युवकों को पीट-पीटकर हत्या, पटना में एक निजी होटल में पिता के सामने बेटी को उठा ले जाने का प्रयास, पटना के कारगील चौक से टेंम्पु सवार छात्रा को अपहरण करने का प्रयास, जहानाबाद के नीट छात्रा को पटना में बाल्तकार सभी घटनाओं के लिए दोषियों को आखिर एनकाउंटर कब होगा? जब बारा चट्टी विधायक व केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के समधीन ज्योती मांझी पर कथित हमला के बाद जिस तरह से मांझी जी का तेवर देखा गया था तो उक्त सवालों पर मांझी जी कब तेवर दिखायेंगे? एक सवाल यह है कि भरत तिवारी जो अपना अंग दान करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को पत्र लिखा था तो क्या ऐसे लोग को अपराधी कहा जा सकता है? भगत सिंह ने भी कहे थे कि एक हाथ में कलम और दुसरे हाथ से पिस्तौल तो क्या भगत सिंह को भी आतंकवादी अथवा अपराधी कहा जा सकता है?