केन्द्रीय न्यूज डेस्क खबर सुप्रभात सामाचार सेवा
बिहार के सभी जिलों की स्थिति काफी दयनीय है। लुट और दमन-उत्पीड़न के क्षेत्र में प्रतियोगिता जारी है। सभी सरकारी नियम और कानून और प्रावधान सिर्फ़ कागज़ के पन्नों में सिमट कर रह गई है। सरकार प्रदत्त तमाम सुविधाओं से पूर्णतः बंचित बंदियों को रखा जाता है। यह संपूर्ण बिहार के जिलों के जेल की यही मौजूदा हालात व सही हकीकत स्थिति हैं। पीयूसीएल की ओर से बिहार के औरंगाबाद जेल की एक क्रूर मार्मिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया जा रहा है,जो कटु सच सर्वविदित है। मानवता और मानवाधिकार का दिनदहाड़े गला घोंटकर यहां दफनाया जा रहा है। पुलिस, प्रशासन एवं सरकार की एकजुट मिलीभगत से काले कारनामों की दरिया बह रही है। विपत्तियों का कृत्रिम उत्पन्न समस्याएं ला खड़ा दिया है। औरंगाबाद जेल की क्रूरतम दास्तां संविधान व कानून सम्मत आवश्यक उचित कारवाई करने के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। दिल दहला देने वाली और रोम सिहरा देने वाली दास्तान विचारार्थ यह प्रस्तुत है।
बिहार के औरंगाबाद मंडल कारा में आज इंस्पेक्टर राज ही स्थापित है। कैसी विडंबना और कैसा मौजूदा माहौल है जरा गौर से इसका दृष्टिपात कर सही एवं सटीक मूल्यांकन ख़ुद करें।यहां के जेल के कैमरा के वार्ड के कुल बरामदे में लगे सीसीटीवी कैमरा के सामने दर्जनों होटल दवंग तथा जेल प्रशासन के चमचा चाटुकार लंपट दलालों के द्वारा जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार के प्रत्यक्ष संरक्षण में यह सब काले कुकृत्य धड़ल्ले से चल रहा है खुलेआम।
बंदियों को सरकार से प्रदत्त सुविधाओं में से दूध के रसगुल्ला वो काला जामुन, पेड़ा और अन्य किस्म की निर्मित मिठाई व आइटम बनाकर जेल की कैंटीन में बिक्री हो रही है। बंदियों को मिलने वाली दही, इसी जेल के कैंटीन में 100 रुपए किलो बिक्री बिना रोकटोक के हो रहा है।
जेल में बंदियों को तम्बाकू यानी खैनी और गांजे, जो पूरी तरह कानूनन निषेध व अवैध है, लेकिन जेल के सिपाही,कक्षपाल और दलाल चाटुकार बंदियों के गठजोड़ से सोना व चांदी के भाव में खैनी वो गांजा की खुले आम बिक्री धुआंधार हो रहा है। विचाराधीन बंदियों से घासभूसा कटवाया जाता है और जो बंदी घास नहीं काटते हैं , वो 500 रूपये नगद देकर अपनी पिंड छुड़ा लेते हैं। मुंह खोलने या शिकायत करने पर बंदियों को बेहद प्रताड़ित तथा पिटाई किया जाता है। जेल बंदियों को अपने काबू या बस में रखने के लिए तो अनेक प्रकार के धमकियां जेल प्रशासन की ओर से लगातार ही दस्तक देते रहती है। आश्चर्य तो यह है कि कभी कभार बड़े आधिकारियों की टीम जेल में निरीक्षण के नाम पर आता है। तब दोषी पुलिस वो अधिकारी अपने बचने के लिए सभी अवैध हथकंडा को अपना लिया जाता है। जेल के भ्रष्ट अधिक्षक दीपक कुमार का यह घमंड है कि पटना से दिल्ली तक सरकार में पहुंच व पैरवी पक्का है, इसीलिए कोई भी मुझे कुछ नहीं बिगाड़ सकता और न तो बाल बांका उखाड़ सकता है।पीयूसीएल के राष्ट्रीय पार्षद दिनेश कुमार अकेला ने जेल औरंगाबाद में चल रहे यह घृणित अमानवीय क्रूर काले कारनामों पर तत्काल रोक लगाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री,गृह सचिव व जेल आई जी को लिखित आवेदन पत्र समर्पित किया जाएगा। अगर समय रहते इस कृत्रिम संकट पर काबू नहीं पाया गया तो यह विस्फोट कर जन आंदोलन का दावानल स्वरूप ग्रहण कर प्रलयकारी प्रारूप में तब्दील हो जाएगा। भावी अप्रिय घटनाओं के लिए जिम्मेदार सिर्फ़ आप और आपकी सरकार ही होगी।
