बतरे नदी पुल की मरम्मत बनी ‘बीरबल की खिचड़ी’, 20 दिनों में मिट्टी तक नहीं हटी, दो मजदूरों के भरोसे चल रहा मरम्मत कार्य, न संसाधन पर्याप्त और न काम की रफ्तार; गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

अम्बा ( औरंगाबाद ) अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा

अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर बतरे नदी स्थित क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत सरकारी कार्यप्रणाली की सुस्ती की मिसाल बनती जा रही है। करीब 20 दिनों से मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन अब तक धरातल पर कोई खास प्रगति नहीं दिखी है। स्थिति यह है कि पुल के दोनों छोर पर जमा मिट्टी तक पूरी तरह नहीं हटाई जा सकी है। महत्वपूर्ण मार्ग पर पुल की मरम्मत में इस कदर धीमी रफ्तार से स्थानीय लोगों और राहगीरों में भारी नाराजगी है। मरम्मत कार्य की जमीनी हकीकत कार्य एजेंसी की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। मौके पर महज दो मजदूर काम करते दिखाई दे रहे हैं। वे सड़क किनारे जमा मिट्टी हटाने और वाइब्रेटर मशीन के सहारे पुल की पुरानी ढलाई की ऊपरी सतह को एक-दो इंच तक छीलने में जुटे हैं। पुरानी और सख्त ढलाई को हटाने में भी मजदूरों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पर्याप्त मजदूर, आधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध नहीं होने से काम की गति बेहद धीमी बनी हुई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह मरम्मत कार्य कब पूरा होगा। मरम्मत कार्य की धीमी गति के साथ इसकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कार्य की प्रगति और कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए कहा कि वे मौजूदा व्यवस्था से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं काम में अपेक्षित प्रगति के बिना ही सरकारी राशि की निकासी न कर ली जाए। हालांकि, राशि की निकासी या अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कार्यस्थल की स्थिति ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर संदेह जरूर पैदा कर दिया है। बतरे नदी का पुल अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसकी मरम्मत में हो रही देरी आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों ने विभाग के वरीय अधिकारियों से स्थल निरीक्षण कराने, कार्य में पर्याप्त मजदूर और आधुनिक मशीनें लगाने तथा मरम्मत की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही कार्य की वास्तविक प्रगति के अनुरूप ही भुगतान सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है। लोगों का कहना है कि केवल कागजों पर मरम्मत दिखाने के बजाय धरातल पर काम तेज कर पुल को जल्द और गुणवत्तापूर्ण तरीके से दुरुस्त किया जाए।