औरंगाबाद:अम्बुज कुमार ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
मगहिया समाज के तत्वावधान में देवकुंड के मंदिर परिसर में मगही चौपाल के तहत परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अलखदेव प्रसाद ‘अचल’ ने की, जबकि संचालन मणिकांत मणि ने किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. अचल ने कहा कि जिस मगध साम्राज्य का इतिहास समृद्ध रहा है, वहीं की मातृभाषा मगही आज भी सरकारी उपेक्षा का शिकार है।मुख्य अतिथि महेंद्र प्रसाद देहाती ने कहा कि मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। मगही चौपाल के माध्यम से इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने और लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। सुधाकर राजेंद्र ने कहा कि मगही समृद्ध साहित्य, संस्कृति और लोक परंपरा वाली भाषा है। पत्रकार एवं साहित्यकार शंभू शरण सत्यार्थी ने कहा कि पांच करोड़ की जनसंख्या रहने के बावजूद मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा रहा है।विश्वजीत अलबेला ने लोगों से आगामी जनगणना में मातृभाषा के कॉलम में मगही दर्ज कराने तथा दैनिक जीवन में अधिक से अधिक मगही का प्रयोग करने की अपील की। गौतम पराशर और सन्नी कश्यप ने बच्चों को मगही भाषा, लोकगीत, लोककथाओं और साहित्य से जोड़ने पर जोर दिया।
कवि सम्मेलन में नंदकिशोर विद्यार्थी ने ‘कइसे कह ह कि मगही हम न जानी ए भइया’ और राजेश विचारक ने ‘मगही हे महान हो भइया’ कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। समुन्दर ने ‘ससुराल’ पर व्यंग्यात्मक कविता सुनाई। कार्यक्रम में दीपक कुमार, वासु कुमार, चितरंजन कुमार, अविनाश कुमार, सुधीर सत्यम, अरविंद अंजान, मुन्ना दीवाना, कमरुद्दीन संस् और सुजीत कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे। अंत में उपस्थित लोगों ने मगही को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के आंदोलन को जनसमर्थन देने तथा गांव-गांव में मगही भाषा के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।


