नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
चिलचिलाती धूप, लहलहाती उमस,भीषण गर्मी की तपिश एवं तेजी से लगातार बढ़ते तापमान के कारण दक्षिण बिहार के रैन साइको जोन में तो भूगर्भ जलस्तर में भी जबर्दस्त गिरावट दर्ज की जा रही है। यहां आज सबसे बड़ा संकट पेयजल है। जिले में क्रमशः जलस्तर भी नीचे गिरता जा रहा है। जिले की मौजूदा हालात में ज्यादातर इलाकों में बीते वर्षों की तुलना में सामान्य रूप से तकरीबन 15 से 27 फीट तक जलस्तर नीचे खिसक गया है। इसके चलते जिले के कई क्षेत्रों में पानी का लेयर क़रीब40 से लेकर 80 फीट की गहराई तक नीचे चला गया है। इस भीषण गंभीर संकट के बीच जूझते संपूर्ण जिले में और खासकर सिरदला एवं कौआकोल प्रखंड में आज फिलहाल सबसे ज्यादा खस्ताहाल।यहां पथरीली पहाड़ी भौगोलिक स्थिति की वजह से व जरूरत से अधिक बालू उत्खनन के कारण जिले का जलस्तर क्रमशः लगातार गिरते जा रहा है। वर्तमान समय में 78 से 80 फीट तक नीचे गिर चुका है। इन दोनों प्रखंडों में 25 फीट तक तो जलस्तर नीचे गिरा है।
इसके बावजूद, अपेक्षाकृत मैदानी तथा सुगम क्षेत्र होने के कारण काशीचक की वर्तमान स्थिति जिले में फिलहाल सबसे बेहतर है। फिर भी यहां की भी जलस्तर में आंशिक गिरावट दर्ज की गई है।
विदित हो कि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी कुछ हफ्तों में मॉनसून की बारिश नहीं हुई अथवा भूजल संचयन यानी वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर पहल जल्द नहीं हुई तो जून का महीना नवादा जिले वासियों के लिए पानी का गंभीर संकट वाला क्षेत्र साबित हो सकता है। खासकर कृषिक्षेत्र में मूंग व गरमा फसलों की बुआई तो बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इतना ही नहीं,बल्कि आम आवाम समेत मवेशियों के सामने मुंहवाये जीवन एवं मरन का संकट खड़ा भी हो गया है।
चापाकल सिर्फ़ शो पीस ही बन कर रह गए :- जिले में जलस्तर में आई भयंकर भारी भरकम गिरावट का सबसे सीधा एवं बुरा असर मूलतः ग्रामीण पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिले के कुल 14 प्रखंडों में अबतक करीब साढ़े तीन हजार से अधिक सरकारी और निजी चापालक पूर्णतः सूख चुके हैं या लेयर भाग जाने के कारण पानी की जगह सिर्फ़ हवा उगल रही है। पानी दूज का चांद बन गया।
कौआकोल, गोबिंदपुर, रजौली और मेसकौर के पहाड़ी इलाकों में अनेकों चापाकल मृत प्राय हैं। सिर्फ़ दिखावटी शोभा की मूर्ति बनकर रह गई है। यह अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के उत्खनन के साथ दोहन और शोषण के लिए आरक्षित एवं सरकार प्रायोजित कृत्रिम संकट या सुनियोजित परिणाम है।
जिले में पांच प्रमुख सबसे ज्यादा जीवनदायिनी नदियों में बेशुमार सकरी, खुरी ,धनार्जय, तिलैया और ढांढर पूरी तरह सूख चुकी है। जरूरत से ज्यादा बालू उत्खनन से नदियों के सुखने से उनके तटीय क्षेत्रों में वाटर लेवल अचानक गिर ही नहीं, बल्कि चरमरा कर ध्वस्त हो गया है। इसके चलते नदी के किनारे बसे लोगों और गांवों में भी पेयजल के लिए हाहाकार के लिए कोहराम मचा हुआ है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री निश्चय नल जल योजना के तहत लगे अवैध मोटर भी लो वोलटेज की वजह से तथा तेज़ी से गिरते वाटर लेवल के चलते बेहद हॉफ और कांप रहे हैं। जबकि चलंत टीम द्वारा PHED के मिस्त्री द्वारा ख़राब पड़े चापाकल को दुरुस्त करा रहे हैं। तकरीबन साढ़े तीन हजार चापाकलों में से लगभग आधे ठीक कर लिए गए हैं। फिर भी, किस चापाकलों में सिलेंडर आदि की समस्या उत्पन्न है,बस वही सब बंद हो गए चापाकल अभी मरम्मत कराने की प्रतीक्षा में कतार में वो पड़े व खड़े हैं।
सरकारी वैकल्पिक व्यवस्था बिल्कुल नदारथ : – पेयजल की इस महा विकराल परिस्थिति से निपटने खातिर स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन अपने- अपने स्तर पर जूझ व झूल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने अगल बगल की बोरिंग या इधर उधर के डब्बों में भरकर पानी लाने को धक्कामुखी खाकर भी मजबूर व लाचार हैं। कई गांवों में तो गरीब ग्रामीणों ने चंदा जमा कर निजी ग्रामीण कुओं को पानी के लिए गहरा किया जा रहा है। इधर, जिला प्रशासन तथा PHED द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के अलावा बिहार सरकार की जल,जीवन व हरियाली योजना के तहत सभी ग्रामीण आहर, पैन एवं पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार का काम युद्धस्तर पर तेज किया जा रहा है, ताकि भावी दिनों में वाटर रिचार्ज नियमित हो सके। गंगा जल उद्भव योजना के सहारे कुछ शहरी एवं चिन्हित चयनित क्षेत्रों में राहत के साथ समग्र विकास पहुंचाने की कोशिश लगातार जारी है। लेकिन, इस कड़वी सच से कदापि इंकार भी नहीं किया जा सकता है कि जिले की ग्रामीण इलाकों की असीमित विशाल आबादी के समक्ष नल जल की मौजूदा व्यवस्था मात्र ऊट के मुंह में जीरा का फोरन सा साबित होकर रह गई है।
प्रखंड जलस्तर स्थिति
- सिरदला, 78 फीट, सबसे खराब वो संवेदनशील हैं।
- मेसकौर में 76 फीट, गंभीर संकट तथा चापा कलों की बुरी हाल।
- काशीचक में 54 फीट, जिले में अभी सबसे बेहतर स्थिति , फिर भी फ्रिकमंद।
- नवादा सदर में 62 फीट, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आंशिक परेशानी।
- रोह में 68 फीट, जलस्तर खिसका व कई चापाकल खराब।
- अकबरपुर में 65 फीट, सभी चापाकलों ने पानी ही देना बंद कर दिया।
- नारदीगंज में 58 फीट, नदियों बालू उत्खनन और सूखने का प्रत्यक्ष असर।
- गोविंदपुर में 76 फीट, विकट स्थिति, काफ़ी गहराई पर पानी दर्शन।
- रजौली में 77 फीट, ग्रामीण क्षेत्र बदहाल और जलस्तर काफी नीचे।
- हिसुआ में 57 फीट, समीपस्थ नदी के सुखने से पानी का लेयर भागा।
- पकरीबरावां में 50 फीट, सामान्य संकट,आमजन व पशुपंक्षी भी प्रभावित।
- वारसलीगंज में 57 फीट, आंशिक संकट के साथ सभी चापाकल जबाव दे रहे हैं।
- नरहट में 55 फीट, मध्यम संकट,दमतोड़ चापाकल।

