मदनपुर की बिजली, जंगल की तितली, मनें में या फिर बनें में

मदनपुर से सुनील कुमार सिंह की रिपोर्ट


विगत तीन दिनों से मदनपुर की बिजली, जंगल की तितली बन चुकी है। बिते शनिवार से ही एक – दो मिनट के लिए बिजली आती है, तथा घंटा – दो चार घंटा के लिए फुर्र हो जाती है। एक तो बरसात के मौसम में भी प्रयाप्त भोल्टेज का नहीं होना, बिजली विभाग की लचर व्यवस्था की पोल खोल रही है। छत के पंखें अपनी गति से चलते नहीं है, सिर्फ हिलते हैं। उपर से भीषण गर्मी का ताप अब बर्दास्त नहीं हो रहा है । हांथों का बेना ( पंखा ) ही एकमात्र सहारा बना है। बिजली की कमी तथा भोल्टेज का कम होनें से न तो नल जल ही चल रहा है और न निजी मोटर ही । नतीजन पेयजल की भी समस्या बन चुकी है। तो वहीं स्कुली बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। बिना बिजली के न तो बच्चे घर पर इस भीषण गर्मी में पढ़ ही पा रहे हैं और न होमवर्क ही बना पा रहे हैं । नतीजन स्कुलों में शिक्षकों की डाँट सुननी पड़ रही है। मिट्टी का तेल भी नहीं मिलता, जो कि लालटेन और ढ़िबरी में जला कर बच्चे पढ़ाई करते और मातायें रात में खाना बना पाती । आखिर उसका जबाबदेह कौन होगा – बिजली विभाग या फिर सरकार। एक तरफ वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी नें वादा किया है कि किसानों को कृषि कार्य करनें हेतु सुबह 6 बजे से संध्या 6 बजे तक निर्वाध बिजली आपूर्ति की जायेगी । तो फिर बिजली विभाग सरकार के आदेश को क्यूँ नहीं अनुपालन करनें को तैयार है ? क्या यह 125 यूनिट फ्री बिजली देनें का खामियाजा तो नहीं है।
किसान एवं मिडिल क्लाश का नागरिक किसे शिकायत करे इस बिजली त्रादशी की ? कोई सुननें वाला भी तो नहीं है ? धान की रोपणी बिजली की कमी से प्रभावित हो रही है। नतीजन धान नहीं लगेंगे, तो उपज कहाँ से होगी ? राष्ट्रीय खाद्यान संकट की ओर बिहार बिजली की कमी से बढ़ता जा रहा है । भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है । ऐसे में बिजली को तितली बननें से कौन रोकेगा । सवाल गंभीर है – पुछता है बिहार का हर नागरिक ।