आलोक कुमार के कलम से
आज देश में हिंदू और मुसलमान ख़तरे में नहीं है। केवल वोट और सत्ता के लिए यह प्रचार किया जा रहा है। सच्चाई यही है। यदि असलियत को तटस्थ और इमानदारी पूर्वक समझा जाये तो आज देश में लोकतंत्र ख़तरे में है और शिक्षा ख़तरे में

है। शिक्षा का निजीकरण,ब्यवसायिकरण,संप्रदायिकरण किया जा रहा है। शिक्षा और रोजगार के लिए उठने वाले हर

आवाज को कुचलने का प्रयास तथा शांतीपूर्ण आंदोलन पर पुलिसिया दमन यह साफ़ जाहिर करता है कि आज देश में

लोकतंत्र और शिक्षा गंभीर ख़तरे में है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार पेपर लीक मामले में देश में हो रहे शांतिपूर्ण

आंदोलनों को सरकार द्वारा पहले तो नजरंदाज किया जाता रहा और आंदोलनकारियों को दबाने के लिए सरकार द्वारा प्रशासनिक दमन, पुलिसिया दमन गोदी/दरबारी मीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। इस स्थिति में जब जनाक्रोश फैलना शुरू हुआ तो आंदोलनकारी छात्र -युवाओं पर पुलिस द्वारा डंडा वर्षाया गया, राइफलों से गोली चलवाया गया और यहां तक कि AK47 से भी गोली चलाया गया। जैसे देश के छात्र – नौजवान और उनके समर्थन में आगे आने वाले लोग आतंकवादी और जेहादी तथा नक्सली हैं।पेपर लीक मामले और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफ़ा के लिए आंदोलनरत बहुतेरे छात्र -युवाओं और इनके समर्थकों को फर्जी मुकदमों में घसीटा जा रहा है तथा जेलों के सलाखों में बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं पुलिस के द्वारा अनगिनत स्केच फोटो भी जारी किया गया है और पहचान कर सलाखों में बंद किया जायेगा। जबकि सरकार से आंदोलनकारियों को यह भरोसा दिया गया था कि सभी आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जायेगा। बावजूद अभी तक कहीं से खबर नहीं है कि आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लिया गया। बल्कि स्केच फोटो जारी कर डराने-धमकाने का प्रयास निरंतर जारी है। मैं मजबूती से फीर कह रहा हूं कि शासक वर्ग द्वारा लोकतांत्रिक पद्धति से आवाज उठाने और लिखने के एवज में कभी नक्सली तो कभी एंटी नेशनल का झूठे आरोप में खतरनाक धाराओं में गिरफ्तार करने का घृनीत कारवाई वर्षों से जारी है। और सच्च कहा जाये तो इसके लिए केवल शासक वर्ग नहीं बल्कि विपक्ष और दरबारी मीडिया भी कम दोषी नहीं है।जब सूदूरवर्ती देहातों और छोटे छोटे शहर कस्बों में शासक वर्ग और इनके पुलिस द्वारा इस तरह दमनकारी कारवाई की जाती है तो यही विपक्ष और गोदी/दरबारी मिडिया आख़िर मौन क्यों रहता है। और जब अपने पर बित रहा है तो हाय तौबा मचा रहे हैं।खैर जो भी हो लेकिन आज जब यह प्रचार सत्ता और शासन में बने रहने और वोट बैंक के राजनीति के लिए यह प्रचार किया जा रहा है कि कहीं हिंदू ख़तरे में है तो कहीं मुसलमान ख़तरे में है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज देश में लोकतंत्र ख़तरे में है, शिक्षा और रोजगार ख़तरे में है।

