आलोक कुमार के कलम से
नीट पेपर लीक मामले को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तिफा के मांग को लेकर देशभर में चल रहे आंदोलन के दबाव में आखिरकार 25जूलाई (शनीवार) को केन्द्र की तनाशाह सरकार झुक गई और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री

धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। “लेकिन शाहब आते -आते बहुत देर हो गई” का चरितार्थ उजागर हो रहा है। यदि छात्र -युवाओं का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण चल रहे भूख

हड़ताल समाप्त कराने का पहल शुरुआती दौर में ही सरकार करती और धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा कर देते तो देशभर में जो हिंसा हुई वह नहीं होता,और सरकार के शाख और प्रतिष्ठा भी बचा रहता। लेकिन सरकार और दरबारी मीडिया तो

आंदोलनकारियों को कोशते रहे यहां तक कि आंदोलनकारियों को विदेशी ताकत, आतंकवादी और नक्सली कहने और इसके लिए प्रोपगंडा फैलाने में मश्गूल रहे। फलस्वरूप जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण चल रहे भूख

हड़ताल की चिनगारी भड़क गया और देशव्यापी महाआंदोलन का रुप ले लिया। आन्दोलन को कुचलने के लिए तानाशाह सरकार दमनात्मक कारवाई में जुट गई। फलस्वरूप देश-भर में शुरू हुआ हिंसा का दौर। आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच जगह जगह संघर्ष हुआ जिसमें दोनों तरफ़ छती हुआ तो इसके लिए आखिर जिम्मेवार कौन है? आंदोलनकारियों पर पैलेटगण, राइफलों से गोली और फिर AK47से फायरिंग के लिए आखिर जिम्मेवार कौन है? जाहिर है कि इतना बड़ा कारवाई गृहमंत्रालय के निर्देश पर ही हुआ होगा और नहीं तो फिर सुरक्षाकर्मियों ने अपने आप किया होगा तो गृह मंत्रालय क्या कर रहा था? यह अभी भी देशवासियों के समक्ष ज्वलंत मुद्दे बरकरार है जिसका जबाब सरकार को देना चाहिए। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा के बाद महाआंदोलन तो समाप्त हो गया है और आधी रात से ही जनतंर मंतर खाली होने लगा है। लेकिन अब सवाल यह है कि सोमवार से आख़िर संसद में क्या होगा ? लोकसभा में नेता प्रतीपक्ष राहुल गांधी ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसके लिए जिम्मेवार मान रहे हैं ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि सदन में हंगामा होगा और नियर भविष्य में और बड़ा जनआंदोलन होगा।

