भारत में लोकतंत्र समाप्त, शिक्षा के क्षेत्र में अबतक का बड़ा आंदोलन, तो पीएम राहुल के लिए खोल देते दरवाजा : राकेश टिकैत

आलोक कुमार के कलम से

दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर संसद दो दिनों से जो हो रहा है उससे साफ़ जाहिर होता है कि भारत में अब लोकतंत्र पुरी तरह से समाप्त हो गया है। जिस लोकतंत्र को बचाये रखने में अनगिनत देशवासियों और राजनेताओं ने अनगिनत कुर्बानी और शहादत दिये हैं उसी लोकतंत्र को मोदी सरकार ने बुटो

से रौंद रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र को बुटो तले रौंदने का नापाक कारवाई से न सिर्फ पुरे देश में गुस्सा है बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत के प्रतिष्ठा शर्मशार हुआ है। मोदी जी जो विश्व गुरु होने का प्रचार प्रसार करते थे आज उनके कुकृत्य का विरोध दुनिया भर में हो रहा है। लंदन, अमेरिका, यूरोप में भी विरोध का स्वर इस बात का संकेत है।

अंतरराष्ट्रीय मिडिया भी यह लिखने के लिए मजबूर हुआ है कि भारत में अब लोकतंत्र समाप्त हो गया है।20 जूलाई को जंतर-मंतर से संसद तक छात्रों का जो जनसैलाब उमड़ा और प्रोटेस्ट हुआ अब तक का शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा आंदोलन है। किसान आंदोलन, अन्ना आंदोलन जैसे बड़ा आंदोलन तो आप देखें होंगे लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में हो रही नाकामयाबी के विरुद्ध इतना बड़ा आंदोलन आजादी के बाद इससे पहले कभी नहीं देखा होगा।जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं वे न तो किसी दल के हैं और नहीं विदेशी मूल्क के हैं। लेकिन जिस तरह मोदी सरकार आंदोलन रत छात्र -युवाओं पर बेरहमी से लाठी डंडा व आंसू गैस के गोले हर्षाया रह देश के लिए असहनीय अवश्य है। सरकार के नाकामियों के विरुद्ध उठने वाले हर विरोध को दबाने और कुचलने के लिए केवल बार बार विदेशी ताकत और नक्सली कहना यह प्रमाणित करता है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक गणराज्य में अब लोकतंत्र समाप्त हो चुका है। लोकसभा में नेता प्रतीपक्ष राहुल गांधी को पीएम आवास के सामने धरना पर बैठने के उपरान्त 21जूलाई को शाम जो भी हुआ उसे पुरा दुनिया देखा है और मोदी सरकार का विश्वशनीयता और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा कर रहा है यहां तक कि विरोध का स्वर विदेशों में भी गुंज रहा है। किसान नेता राकेश टिकैत ने एक एक चैनल में इंटर ब्यू देते कहे कि यदि नेता प्रतीपक्ष का काम ही धरना -प्रदर्शन करना है। यदि पीएम हाऊस के सामने नेता प्रतीपक्ष धरना पर बैठे थे तो पीएम राहुल के लिए दरवाजा खोल देते और चाय पिलाते तथा सकारात्मक बातचीत करते तो पीएम का शाख और प्रतिष्ठा बच जाता। इतिहास गवाह है कि जब लोक नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तनाशाही रवैया के विरुद्ध संसद मार्च ” सिंहासन ख़ाली करो की जनता आती है” नारों के साथ जब जनसैलाब पहुंचा था तो इंदिरा गांधी ने दरिया दिल दिखाते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण को शालिनता और महान चरित्र का परिचय देते हुए चाचा कहकर नवाजे गए थे।