अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात सामाचार सेवा
औरंगाबाद जिले का उपभोक्ता न्यायालय सिर्फ नाम भर रह गाया है, यहाँ आम व्यक्तियों की सुविधायें नदारद है। शिकायतकर्त्ता जव शिकायत लेकर जाते हैं तो न तो उन्हें प्रयाप्त बैठनें की ही जगह है और न कोई साधन – सुविधा ही । लोग इस 48 डिग्री की तपीस वाली गर्मी में बिना पंखा, बिना कुर्सी – बेंच को खडे रहनें को मजबुर होते हैं। सवसे चौकानें वाली बात तो यह है कि हलक सुखा देनें वाली इस भीषण गर्मी में एक ग्लाश पीनें की पानी की भी व्यवस्था नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलायें एवं दिव्यांग जनों के लिए भी सुविधा नदारद है। एक ओर तो सरकार का दावा है कि बिहार में सुशासन की सरकार कायम है तो फिर उपभोक्ता न्यायालय इस व्यवस्था में उपेक्षित क्यूँ है ? पुछता है भारत । सूत्रों की मानें तो उपभोक्ता न्यायालय एक यातनागृह बनकर रह गया है, जो यहाँ हर आने वाले फरियादी को सुविधा के नाम पर चिढ़ाता नजर आता है।


