आलोक कुमार संपादक सह निदेशक ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
योगी जी और मोदी जी आखिर क्या समझते हैं अपने आप को? यह चहुंओर सवाल हवा के तरह तैर रहा है। पहले तो इन्होंने पीएम केयर फंड को आरटीआई से बाहर किया फीर राम मंदिर ट्रस्ट को बाहर आरटीआई से किया। उत्तर प्रदेश सरकार एक अनुमान के अनुसार रोज़ 2करोड 32 लाख

रुपए विज्ञापन में खर्च करती है। वैसे विज्ञापन मद् में किये गए ख़र्च का लेखा जोखा सार्वजनिक नहीं होने देना चाहते हैं। वर्ष 2017- 2026 के बीच एक 2022 का ब्योरा किसी तरह सामने आया है, जिसमें न्यूज 18 को एक वर्ष के लिए 28 करोड़, एबीपी न्यूज को 24 करोड़ और इंडिया टूडे को 10 करोड़ रुपए एक वर्ष के लिए विज्ञापन मद्य में भुगतान किया गया है। अन्य छोटे छोटे चैनलों या प्रिंट मीडिया को भी दिये होंगे। अब सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार के खामियां या फिर ब्यवस्था के विफलता क्या इन चैनलों अथवा मिडिया द्वारा कभी दिखाया जा सकता है। नहीं कभी सोचा भी नहीं जा सकता है। सरकार तो केवल हिंदुस्तान – पाकिस्तान तो कभी गो हत्या और मंदिर मस्जिद का मुद्दा गोदी मिडिया या कहुं तो विज्ञापन के बदौलत देश को गुमराह करने और देश के अंदर मौजूद ज्वलंत सवालों जैसे कृषि संकट, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार को नजरंदाज करने में सक्रिय हैं।

