राजस्व कर्मचारी सामुहिक हड़ताल पर, सरकार पीला रही है आश्वासनों की घुंटी,  बेहाल जनता काट रही है अंचल कार्यालयों का चक्कर

सुनील कुमार सिंह खबर सुप्रभात समाचार सेवा


एक ओर पुरे बिहार के राजस्व कर्मचारी सामुहिक हड़ताल पर चले गये हैं, तो वहीं दूसरी ओर जनता अपनें कामों को लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर काट रही है। दाखिल खारीज, आय प्रमाण पत्र, आपदा राहत, वंशावली, उतराधिकार प्रमाण पत्र, पारिवारिक सूचि आदि के कार्य राजस्व कर्मचारी के नहीं रहनें से नहीं बन पा रहे हैं । नतीजन जनता अंचल कार्यालयों का चक्कर काट – काटकर परेशान है। पुरा वितिय वर्ष 2026 – 27 में अंचल कार्यालयों में काम नहीं के बराबर हुए हैं। कभी अंचलाधिकरियों का हड़ताल तो कभी राजस्व कमचारियों का हड़ताल, कभी भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री से अंचलाधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति तो कभी स्थानांतरण, कभी राजस्व कर्मचारियों का हड़ताल में अक्टुबर माह खत्म होनें वाला है। तो वहीं भूमि सर्वे के नाम पर रैयतों से बार – बार कागजों की माँगा की जाती रही है, ताकी जनता अपनी जमीन बचानें में व्यस्त और परेशान रहे उसे सरकार की सही – गलत और मंहगाई पर सोचनें को मौका ही नहीं मिले। एक प्रसिद्ध दार्शनिक नें साफ लफ्जों में कहा था – कि जनता को अपनी समस्या में उलझाये रखो और आराम से सत्ता का सुख भोगते रहो । शांत और स्थिर जनता विकास की कसौटी पर सरकारें को तौलती है और उखाड़ फेंकनें को गोलबंद हो जाती है। यह बिल्कुल ही वर्तमान दौर में सच सावित होता दिखता है।
राजस्व कर्मचारी अपनी पुरानी मांगों को लेकर विगत एक माह से एकबार फिर से सामुहिक हड़ताल पर चले गये हैं। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी महासंघ के महा सचिव नंदन कुमार के हवाले से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया है कि हड़ताली राजस्व कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंड़ल से कई बार सरकार के मंत्री एवं आला अधिकारियों के बीच लंबित माँगों के समर्थन में वार्ता हुई एवं सहमती पत्र बनें । सरकारी आदेश सिर्फ फाईलों में ही सिमटकर रह गया, कर्मियों को सिर्फ आश्वासनों की घुँटी ही पिलाई गयी । सरकारी कामों का बोझ सिर्फ बढ़ाये जाते है, उसके अनुकूल संसाधन नहीं दिए जाते हैं। समय पर कार्य पुरा नहीं होते पर कर्मी ही दंड़ित होते हैं। ग्रेड पे, पदोन्नति का लाभ गृह जिला स्थानांतरण, आवश्यक संसाधन मुहैय्या आदि पुरानी माँगें जबतक नहीं मिल जाती है, तबतक आर – पार की लड़ाई जारी रहेगी । जिस विभाग में व्यवस्था ही लंगड़ी हो, वहाँ कर्मचारियों के सिर्फ दौड़ने से रैयतों का कल्याण कतई नहीं होगा।