मदनपुर से सुनील कुमार सिंह की रीपोर्ट
” मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ” की कहावत को चरितार्थ कर दिखाया एक कलाकार नें – – नाम है लक्षमण नामदेव वणवीर । ये व्यक्ति पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों, अहमदाबाद प्लेन हादसा में मारे गये भारतीयों तथा सीमाओं पर वीरगति को पाये सैनिकों की आत्मा को पिण्डदान करनें हेतु सद्भावना यात्रा पर एक अकेला इंदौर से ढ़ोल बजाते हुए गया जी पहुँचे । वहाँ विष्णुपद के समीप पवित्र फल्गु नदी में सभी मृत आत्माओं को पीण्डदान किया, तर्पण किया तथा उनकी मोक्ष के लिए प्रार्थना की । तत्पश्चात पुनः ढ़ोल बजाते हुए पैदल बोधगया होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या -119 होते हुए बनारस, विंध्याचल, प्रयागराज,अयोध्या जी होते हुए इंदौर के लिए चल पड़े । आज दोपहर में मदनपुर में खबर सुप्रभात के प्रतिनिधि से एक औपचारिक मुलाकात में उन्होनें अपनी इस सद्भावना यात्रा का उद्देश्य बताया । उन्होनें आगे बताया कि राष्ट्र सेवा से बड़ा कोई सेवा नहीं है, मानवता से बड़ा कोई मजहब नहीं है। नर सेवा ही नारायण की सेवा है। जो देश को लुटता है, उससे बड़ा कोई गद्दार नहीं है। यहाँ तो लोग भगवान के घर में भी लुटना चालु कर दिया है। जब -जब घरती पर पापियों का अत्याचार बढ़ा है, तब -तब उनके संहार के लिए ईश्वर किसी – न – किसी रूप में अवतार लिया है, चाहे राम बनके चाहे श्याम बनके ।
