औरंगाबाद ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
2 अक्टुबर को गाँधी जयंती के सुअवसर पर मंडल कारा औरंगाबाद में बंदियों के द्वारा गाँधी जयंती मनाया गया । सूत्रों की मानें तो जेल प्रशासन द्वारा गाँधी जयंती मनानें हेतु गाँधी जी की तस्वीर फुल – माला एवं प्रसाद की व्यवस्था की गयी थी । गाँधी जी का प्यारा भजन – “रघुपति राघव राजा राम……………. सबको सन्मती दो भगवान ।” काफी श्रद्धा से गाये गये । क्या सन्मती( सत्य और ईमानदारी का मार्ग ) सिर्फ बंदियों के लिए ही जरूरी है कि जेल अधिकारियों के लिए भी जरूरी है। जेल कार्यालय में ” सत्यमेव जयते ” का बोर्ड लगा है । लेकिन जेल में बंदियों के साथ जेल अधिकारी अंग्रेजी हुकुम्मत से भी ज्यादा अत्याचार करते हैं। कोई भी बंदी को भरपेट भोजन नहीं दिया जाता है। जेल में दो – दो कैंटिन चलाये जाते हैं जहाँ सौ रुपये प्रतिदिन पर पैसे वाले बंदी को अच्छा भोजन दिया जाता है। २० रुपये में चाय मिलती है। 100 रुपये में बाल काटे जाते हैं। पाँच हजार से सात हजार में सोनें के लिए जगह बिकती है । जो वार्डेन होते हैं वे जेल प्रशासन से मिलकर लाख – दो लाख में एक साल का एक बैरेक का ठेका ले लेते हैं। कमजोर बंदियों से सोनें की जगह के एवज में पैसा लेते हैं और जेल प्रशासन का संरक्षण पाते हैं। जो बंदी इस व्यवस्था के खिलाफ आबाज उठाता है,उसकी पिटाई की जाती है तथा सेल में डाल दिया जाता है।
क्या गाँधी जी का रामराज यही है ? सत्यमेव जयते यही है ? सबको सन्मती दो भगवान सिर्फ नारा ही बनकर मंड़ल कारा औरंगाबाद में रह गया है क्या ? तमाम सबाल आज भी अंगुलियाँ उठा रही है। ” भुखे भजन न होहीं गोपाला, लेलो आपन कंठी माला “।
