औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में आरटीआई कानून को मज़ाक बना दिया गया है। समय पर सूचना नहीं उपलब्ध कराने का आखिरी मुख्य कारण भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास नहीं तो और क्या हो सकता है। उल्लेखनीय है कि कुटुम्बा प्रखंड के ग्राम परता निवासी व समाजिक कार्यकर्ता सह पत्रकार आलोक कुमार ने जिलाधिकारी से सूचना अधिकार कानून के तहत सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध प्रपत्र ” क” के तहत आवेदन दिया था। काफी समय के बाद दिनांक 21 सितम्बर को जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय से सुनील कुमार नामक सहायक ने अपने मोबाइल नंबर 7488285846 से आलोक कुमार के मोबाइल नंबर 7858996975पर 16:24(PM) में जानकारी देते हैं कि जिला अधिकारी से आप सूचना मांगे हैं जो मेरे कार्यालय में सूचना देने के लिए आदेश आया है। लेकिन सूचना उपलब्ध इस लिए नहीं कराया जा रहा है कि यह मेरे क्षेत्राधिकार के अंतर्गत नहीं आता है। जब मैं पुनः दिनांक 22/9/2026 को उनसे मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध किया तो फिर वही जवाब मिलता है कि यह मेरे क्षेत्राधिकार में नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि तो क्या जिलाधिकारी द्वारा आपके कार्यालय को आदेश दिया गया है तो ग़लत है? इसके बाद फोन काट दिया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय के बीच सूचना लटका रहेगा या फिर सूचना उपलब्ध कराया जाएगा? यदि नहीं तो क्या यह साबित नहीं होता है कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का यह सब सोची समझी षड्यंत्र व कुटरचना है? यदि नहीं तो सूचना नहीं उपलब्ध कराने वाले जिम्मेवार लोक सूचना पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए सूचना उपलब्ध कराया जाएगा या फिर पुरे मामले को लटका कर रखा जायेगा? सुनील कुमार सहायक द्वारा मोबाइल फोन पर किये गए बातचीत का रिकार्डिंग भी मौजूद है जो समय पर काम आयेगा।


