वो नहीं जलवाते थें दीये, ये बार – बार कहते हैं दीये जलाओ ” कहीं दीप जले तो कहीं दिल “

केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा


भारत के प्रधानमंत्रियों में सबसे लम्बा कार्यकाल पंड़ित जवाहर लाल नेहरू का रहा है । वे 1947 से 1964 तक लगातार 18 वर्षों तक सतासीन रहे । इनके ही कालखंड में इसरो, एम्स, आई आई टी, आई आई एम, कोशी बैराज ( नेपाल सीमा ), महिलाओं को समान मतदान का अधिकार, गुट निरपेक्ष सहीत कई अनगिनत कार्य किए । तभी तो इनके कार्यकाल को भारत का स्वर्णीम कार्यकाल कहा जाता है।

सुनील कुमार सिंह, उप संपादक खबर सुप्रभात

इनके बाद गुलजारी लाल नंदा ( कार्यवाहक ),लाल बहादुर शास्त्री, गुलजारी लाल नंदा, इंदिरा गाँधी, मोरारजी देशाई, चौधरी चरण सिंह, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह,चंद्रशेखर, नरसिंहा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी. देवगोड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल विहारी वाजपेयी, डा. मनमोहन सिंह के बाद वर्ष 2014 से नरेन्द्र दामोदर दास मोदी अबतक कायम हैं।
लाल बहादुर शास्त्री जी के कार्यकाल में भारत – चाईना युद्ध, भारत – पाकिस्तान युद्ध लड़ा गया । इंदिरा गाँधी जी के कार्य काल में एकबार फिर से भारत – पाक युद्ध हुआ । पाक फतह के बाद उसके दो टुकड़े पाकिस्तान एवं बंगला देश कर दिया गया । अटल बिहारी जी के कार्यकाल में कारगील युद्ध हुआ । भारतीय सेना नें पाक सेना का भारी नुकसान कर कारगील फतह पायी । लेकिन कारगील विजय के बाद भी वाजपेयी जी नें भारतीय जनता से न तो थाली पिटवाया और न ही शंख और घड़ियाल ही बजवाये और न दीये ही जलवाये । इनके शासन काल में प्याज 6 रूपये प्रति किलो, चीनी 20 रुपये प्रति किलो, सरसो तेल 40 रुपये प्रति किलो, आँटा 10 रुपये प्रति किलो तथा पेट्रोल 36 रुपये प्रति लिटर एवं सोना 6 हजार रुपये ( 10 ग्राम / 2 4 कैरेट ) का भाव था । जनता को फिल गुड़ का सपना दिखाया गया लेकिन न तो दीये जलवाये गये और न थाली और ताली ही बजवाये गये ।
इसके वावजुद भी भारत में वर्ष 2004 के आम चुनाव में कांग्रेस के हाँथ में सत्ता का हस्तांतरण हो गया । वर्ष 2014 तक लगातार दस वर्षों तक डा. मनमोहन सिंह के हाँथ में देश की वागडोर रही और के प्रधानमंत्री के पद पर कावीज रहे। इन्होनें भी जनता से नतो दीये जलवाये और न थाली और ताली ही बजपाये ।
वर्ष 2014 में कांग्रेसी सरकार की नाकामी, बढ़ती मंहगाई का ढिंढ़ोरा पीटकर भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ हस्तिनापुर की गद्दी कब्जा ली । नरेन्द्र भाई मोदी प्रधानमंत्री बनें । तबसे तिसरी बार लगातार दिल्ली की तख्त पर आसीन हैं । वर्ष 2020 में कोरोना महामारी आयी । लोगों नें प्रधानमंत्री केयर फंड़ में खुब दान दिया । बती जलाई – बती बुझाई, थाली – ताली पीटे, शंख – घड़ियाल खुब बजाये, दीप जलाकर कोरोना जैसी महामारी को भगा दिया । देश में प्रधानमंत्री जी के आदेश का अक्षरतः पालन किया । जनता नें भी सोंचा – चलिए ! देश के लिए बिना रुके 24 घंटा काम करनें वाला यशस्वी प्रधानमंत्री जब ताली – थाली – दीये के लिए कह रहे हैं, तो साथ देना चाहिए । देश नें खुब साथ दिया, कदम से कदम मिलाया ।
लेकिन 17 सितम्बर 2026 को एकबार फिर से महामानव के जन्म दिवस पर दीये जलानें को बोला गया तो जनता सन्न रह गयी । जनता मँहगाई के बोझ से दवी जा रही है । पेट्रोल 100 के पार प्रति लिटर, प्याज 50 पार, आँटा 40 के पार,चीनी 75 पार, सरसो तेल 200, सोना डेढ़ लाख रुपये के उपर दस ग्राम बिक रहे हैं । मँहगाई दिन प्रतिदिन बेकाबु होते जा रहा है । एक तरफ राम मंदिर में चंदा चोरी, देश का पैसा लेकर कुछ पूँजीपतियों का विदेशों में भाग जाना, अडाणी एवं अम्बानी का सरकार के प्रति अर्थवत मोह,बढ़ती बेरोजगारी है तो वहीं दुसरी तरफ UGC, SC / ST, आरक्षण की नीतियों में संशोधन, NEET पेपर आउट, जेन जी आन्दोलन, स्वर्ण आन्दोलन जैसे मुद्दे पर देश आपात काल की स्थिति में पहुँचती दिख रही है ।देश में दो धड़ा सक्रिय हो चुका है । स्वर्ण बेचारा और असहाय तथा इस सरकार में ठगा महसुस कर रहा है । ऐसे में जन्म दिन पर दीये जलानें को कहना, जले पर नमक छिड़कनें जैसा है। जिस सवर्णों नें भाजपा को 3 से 300 के पार पहुँचाया, फर्श से अर्श पर बैठाया । आज यही स्वर्ण तवका इस सरकार की गालत नीतियों के कारण बेचारा बन चुका है। कभी मंदिर – मस्जिद कर लड़ाया तो अभी स्वर्ण एवं अन्य जातियों को आपस में लड़ा रही है । देश गृह युद्ध के मुहानें पर आन खड़ी हो गयी है। वर्तमान दौर में भी अंग्रेजी नीतियों – फुट डालो और शासन करो की पाठशाला खोलकर राजकरण में पाठ पढ़ाया जा रहा है।
इन्हीं सब कारणों से देश का मन दुखित रह रहा है,जिसका परिणाम साफ दिखा कि 17 सितम्बर को दीप कहीं – कहीं – ही जले । शेष पुरे भारत में – सिर्फ दिल जले ! सिर्फ दिल ही जले!!