संवाद सूत्र नई दिल्ली ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
शिक्षा प्रणाली में हालिया विफलता और लगातार हो रहे पेपर लीक के विरुद्ध चौतरफा घिरे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा जनतंर मंतर पर शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर डटे सोनम बागचुक को जबरन उठाने और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने के विरुद्ध आज 20 जूलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन छात्रों का संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर लोकतांत्रिक पद्धति से उठने वाले विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज कर ही दिया। सरकार के द्वारा लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने के लिए बीएनएस के धारा 163 यानी निषेधाज्ञा लागू किया गया था और इसके लिए पांच हजार पुलिस तथा आंसू गैस की कई गाड़ियां तैनात किया गया था।अब तक के देश का सबसे बड़ा संसद मार्च जो शांति एवं लोकतांत्रिक पद्धति से आयोजित था उसे कुचलने के लिए इतना बड़ा जाल से साफ़ जाहिर होता है कि 25जून 1975 के घोषित इमरजेंसी से भी बुरा हाल देश के सामने है। देश की तथा कथित लोकतांत्रिक सरकारें जब अपने ही देश की जनता और छात्रों तथा अनशनकारी लोगों से वार्ता करने से डरी हुई है तो फिर सरकार फासिस्ट चाल चरित्र नहीं तो और किस रास्ते पर चल पड़ी है?खबर यह भी प्राप्त हो रही है कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अपना भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए सरकार और विपक्ष के तमाम जनप्रतिनिधियों के समक्ष तीन शर्तें रखे हैं। पहला शिक्षा प्रणाली में हालिया विफलताओं और पेपर लीक के लिए सरकार अपना जिम्मेदारी स्वीकार करे दुसरा उन्हें और उनके सभी लोगों को संसद तक जाने के लिए अनुमति दे तीसरा मांग है कि विपक्ष के सांसदों द्वारा मुझे आश्वासन दे की संसद में उन सभी मुद्दों को उठाये। लेकिन मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा था उसे अपने मांगों में शामिल नहीं किया जाना यह संदेह उत्पन्न कर रहा है कि वांगचुक कहीं सरकार के दबाव में तो नहीं हैं? यदि सरकार दबाव बना रही है तो मतलब साफ़ है कि अब देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को मौजूदा सरकार ध्वस्त कर चुकी है।


