डीके अकेला की रिपोर्ट
आजकल कुछ छुटभैये-लूटभैये सत्ता संपोषित चाटुकार राजनेताओं के बिगड़ैल बोल ने जातीय उन्मादी चाशनी बड़े ही चाव से बखूबी परोसने में आपसी प्रतियोगिता युद्ध स्तर पर धड़ल्ले से जारी है। भरत भूषण तिवारी इनकाउंटर को न्यायोचित की मुहर लगाकर इंसानियत,मानवता, न्यायालय और मानवाधिकार को बुरी तरह शर्मसार कर दिया है। सुशासन व कानून की राज की ढिंढोरा पीटने वाली डबल इंजन की निर्लज्ज सरकार की पोल को खोल कर पूरी तरह बेनकाब कर नंगे जन कठघरे में खड़ा कर दिया है। भारत भूषण तिवारी इनकाउंटर में सरकार द्वारा कृत्रिम संकट में उलझकर बुरी तरह फंस गई है। नहीं तो उगलते बन रहा है और न तो निगलते बन रहा है। यह फेंक व फर्जी इनकाउंटर सम्राट चौधरी उर्फ़ बुलडोजर बाबा के गले का फास बन गया है।* पड़ गेल राम कुकुर के पाले *। सत्ता के माहिर दलाल नागमणि, केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, राजद विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा भरत भूषण तिवारी की सरकार प्रायोजित साजिश के दरम्यान फर्जी मुठभेड़ में हत्या मामले में जातिय संघर्ष व उन्माद पैदा करने की नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जातिवाद का जहर घोला जा रहा है।ये भ्रष्ट कमीशनखोर राजनेता सत्ता की नग्न चाटुकारी में लापरवाही के कुचक्र में फंसा गैर जिम्मेदाराना व कायराना बयान देकर खुद ही जोख़िम उठाने की सौदेबाजी में पूर्णतः संलिप्त हैं। पूर्व में भी हुए कई आपराधिक जघन्य घटना के बाद मांझी जी का हृदयहीन व संवेदनहीन ब्यान ने जबर्दस्त सनसनी फैला दी है। जातीय उन्माद फैलाने में रातदिन बड़े मशगूल हैं। खासकर भरत भूषण तिवारी मामले में आये सोशल मीडिया पर साक्ष्य के अनुसार वह कहीं से भी अपराधी प्रतीत नहीं होता है। यहां तक कुछ सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के नेताओं ने भी खुलकर भरत भूषण तिवारी की हत्या को सरकार प्रायोजित बतलाया। जमकर विरोध किया जा रहा है। बिहार सरकार द्वारा न्याययिक जांच कराने की अनुमति और दोषी पुलिसकर्मियों को तुरन्त निलम्बित कर प्राथमिकी दर्ज करना यह दिन की रौशनी सा साफ़ साबित कर दिया है कि ऊपरी आदेशानुसार पुलिस द्वारा 5 गोली मारकर भरत भूषण तिवारी की हत्या कर दी गई है। यह मुठभेड़ नहीं विशुद्ध हत्या है। स्थानीय दलित एवं पिछड़े समुदाय के लोग एकजूट जहां भरत भूषण तिवारी को समाज के लिए संघर्षरत सच्चे सिपाही व देशभक्त बताया जा रहा है। गरीबों का मसीहा व देवता आम लोगों ने बताया।वहीं,उक्त भ्रष्ट व बेशर्म नेताओं द्वारा चंद निजी स्वार्थ,वोट बैंक और कुर्सी के चक्कर व लालच में पुरे मामले को सच्चाई को दरकिनार कर घृणित एवं नापाक अमानवीय जातिय रंग परोसकर खूनी उन्माद में तब्दील करने की कुत्सित प्रयास जारी है। शासन -प्रशासन की क्रुरता,जनविरोधी दमनात्मक रवैए से उबकर उग्र होकर विकल्पहीनता की स्थिति में भरत भूषण तिवारी मजबूरन हथियार उठाने के लिए वेवश व लचार हुआ था। लेकिन,जब वह सरेंडर किया तो फिर हत्या हुई क्यों? यह यक्ष प्रश्न मुंहवाये देश और समाज के समक्ष खड़ा है। सम्राट चौधरी की सरकार पूर्णतः निरुत्तर हैं। यह कहने में अब तो कोई कोताही या अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब उट पहाड़ के नीचे आ गया है। भरत भूषण तिवारी की हत्या ने सरकार नींद हराम कर चूलें हिला कर रख दी है। भरत भूषण तिवारी की हत्या कर उनके विचारधारा को कभी भी कदापि नहीं ख़त्म किया जा सकता है। क्या गांधी जी की हत्या करके यहां से गांधीवादी विचारधारा जड़ से क्या समाप्त हो गया है ?
जब से भाजपा नीतीश को अपने ही गिरफ्त में मजबूती से जकड़कर सम्राट चौधरी की सरकार बनी,इने गिने दिनों में बिहार को महाजंगल गुंडाराज में निर्लज्जता से तब्दील कर देने पर बेसब्री से उतारू है। बिहार में आए दिन लगातार हत्या,लूट,बलात्कार, शोषण दोहन,दमन,बढ़ते अपराध और वहशी पुलिस जुल्म में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लोगों का सूखचैन से जीना दुश्वार कर दिया है। आंखों से नींद गायब हो गई है। चारों ओर कोहराम मचा हुआ है। आज सम्पूर्ण बिहार भयंकर अस्त्त-व्यस्त एवं तंगोतबाह के कगार पर खड़े त्राहिमाम में हैं। इसके चलते एक ओर तो यहां मेहनतकश जनता भारी दहशत व आक्रोश में उबल रही है। सरकार की जन विरोधी रवैया और नीतियों के कारण तेज़ी से बढ़ते उभरते जन आक्रोश अब जन आंदोलन का गंभीर शक्ल अख्तियार कर लिया है। नाम नहीं छापने या बताने की शर्त पर कुछ सरकारी कर्मी ने बताया कि सम्राट चौधरी की सरकार में खासकर SC/ST व OBC के लोगों पर बढ़ते लाठी एवं गोली चार्ज की घटनाओं से बढ़ते जनाक्रोश एवं गिरते साख से बौखलाकर जनाक्रोश को पाटने,ठंढा या मेकअप करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से सरकारी सह व संरक्षण में ठंढे दिमाग से भरत भूषण तिवारी की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर योजनाबद्ध तरीके से हत्या की गई है। मगर यह दाव सरकार के लिए उल्टा पड़ गया है। SC/ST व OBC के लोगों के बीच तेजी से उभरते गुस्सा,आक्रोश तथा विक्षोभ को शांत करने की नापाक कोशिश में भरत भूषण तिवारी की क्रूर हत्या कर दी गई। पहले तो SC/ST और OBC के लोग विक्षुब्ध व आंदोलित थे।लेकिन,अब भरत भूषण तिवारी की हत्या से तो अगड़ी समाज के साथ हर न्याय पसंद, संवेदनशील व आमलोगों का गुस्सा सातवें आसमान छूती दिख रही है।पूरे देश में बगावत दावानल स्वरूप ग्रहण कर लिया है। भावी दिनों में भयंकर तूफ़ान व बवंडर खड़े होकर डबल इंजन की भ्रष्ट सरकार की बखिया उधेड़ कर मिट्टी पलीद कर देगी। आनेवाले दिनों में * रहा ना कूल कोई रोवनहारा * वाली जैसी कहावत को चरितार्थ कर देगी।
