रोह में हुई संप्रदायिक दंगा का पीयूसीएल ने जिला प्रशासन को सौंपा जांच रिपोर्ट, गीनाया प्रशासनिक खामियां, जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया जांच रिपोर्ट

नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट


नवादा जिले के अंतर्गत रोह बाजार में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर PUCL, बिहार की जांच रिपोर्ट नवादा जिला पदाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक को पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल की ओर से आज ही सौंपा गया है।
विदित हो कि रिपोर्ट में वर्णित विषय व तथ्य के आधार पर सच यह है कि मानवाधिकार से जुड़े लोक स्वातंत्र्य संगठन (PUCL) पीयूसीएल यानी पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल

लिबर्टीज, बिहार ने पिछले 28-29 मार्च को नवादा जिले के अंतर्गत रोह बाजार में हुई सांप्रदायिक हिंसा अपनी आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर दी है। 05 अप्रैल 2026 को घटना स्थल की जांच पड़ताल करने वाली सात सदस्यीय टीम ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की गंभीर कमियों और खासकर संदेहास्पद लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
मुख्य निष्कर्ष : –


** प्रशासनिक निष्क्रियता **
27 मार्च 2026 को दक्षिणपंथी सांप्रदायिक संगठनों जबरन रोह बाजार बंद कराने की खुली चेतावनी के बावजूद पुलिस ने कोई उचित एहतिहाती करवाई नहीं की।
** निर्देश का उलंघन **
रामनवमी की शोभायात्रा तय समय से कई घंटे देरी से निकली और सख्त सरकारी प्रतिबंध के बावजूद चार -चार डीजे की गैर कानूनी इस्तेमाल किया गया, जिसे रोकने में साथ चल रहे पुलिस -प्रशासन पूर्णतः विफल रहे। चीर हरण की तरह सब के सब सरकारी महारथी आखिर मौन क्यों थे ?
** लक्षित हिंसा **
28 और 29 मार्च को दंगाईयों एवं सांप्रदायिक उन्मादी तत्वों की एक भीड़ ने रोह बस स्टैंड पर अवस्थित मुस्लिम समाज के कुछ फुटपाथी दुकानदार की दुकान में पेट्रोल छिड़काव कर आग के हवाले कर दिया गया,जिससे गरीब दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
** पुलिस बर्बरता वो फर्जी गिरफ्तारियां **
उक्त घटित घटिया घटना के बाद पुलिस ने आधी रात को अनेकों घरों में घुसकर काफ़ी बेरहमी से तोड़फोड़ किया। महिलाओं तथा निर्दोष आम नागरिकों से बहुत बुरी तरह मारपीट की। साथ कई पूरी तरह निर्दोष मासूमों फर्जी मुकदमा में फंसाकर तंगोतवाह बेशर्मी से किया जा रहा है। ताजुब तो इस बात की है कि जो दूसरे राज्य के अस्पताल में भर्ती व्यक्ति का नाम भी नामजद आरोपित में उल्लिखित है। यह कैसी विडंबना है और कैसा कुकृत्य है ?
पीयूसीएल की मुख्य मांगें : –


  1. ** न्यायिक जांच ** : – इस हिंसा की तत्काल न्यायिक जांच की जाय, जिसमें तैनात पुलिस प्रशासन की संदेहास्पद और लापरवाही भरी गैर जिम्मेदाराना भूमिका को भी शामिल किया जाए।
  2. ** पीड़ित को मुआवजा* आगजनी और लूटपाट के शिकार हुए सभी छोटे टूटपंजिया दुकानदार को प्रशासन वो सरकार द्वारा तुरंत और प्रयाप्त उचित मुआवजा दिया जाए।
  3. * निर्दोषों की रिहाई * घटनास्थल के सीसीटीवी और आधिकारिक किए गए बीडीओग्राफी फुटेज की जांच कर असली अपराधियों की पहचान कर तलाश कर उस पर त्वरित मुकदमा चलाए जाना चाहिए तथा निर्दोषों का नाम फर्जी प्राथमिकी से अविलंब वापसी के लिए पहल करें।
  4. * शांति और सदभाव की पहल * भविष्य में आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए दोनों समुदायों को लेकर एक सक्रिय शांति समिति का गठन किया जाए और नियमित बैठक होनी चाहिए, ताकि भावी दिनों में फिर दुबारा इसकी पुनरावृति नहीं हो सके।
  5. * जीरो टॉलरेंस नीति * भविष्य में ऐसी जघन्य अपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन बिना किसी भेदभाव के सांप्रदायिक संगठनों एवं तत्वों पर कड़ी निगरानी रखें और जीरो टॉलरेंस नीति की ईमानदारी से अपनाएं।
    पीयूसीएल की प्रतिनिधि मंडल :
  6. दिनेश कुमार अकेला, राष्ट्रीय पार्षद,पीयूसीएल,
  7. डॉ. ओंकार निराला, जिला अध्यक्ष,नवादा,पीयूसीएल
  8. नारायण पासवान, सचिव, नवादा, पीयूसीएल,
  9. मो. सब्बाउद्दीन, सदस्य, पीयूसीएल, नवादा,
  10. मो. इनायत उल्लाह कासमी,सदस्य, पीयूसीएल, नवादा
  11. प्रो. विप्लेंदु कुमार, सदस्य, पीयूसीएल नवादा।
    पीयूसीएल की प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों से सहानुभूतिपूर्वक करीब आधे घंटे तक, सार्थक व सकारात्मक बातचीत हुई। डीएम, नवादा ने पीयूसीएल की मांग को जस्टिफाई करते हुए कहा आपका मांग पूर्णतः न्यायोचित है। हम गंभीरतापूर्वक इस पर ठोस कारगार क़ानूनी कदम उठाएंगे। आपके जांच रिपोर्ट से सरकारी महकमा पूर्ण रूपेण संतुष्ट और उसके आलोक में सक्रिय व कार्यरत हैं।
    ज़िला पदाधिकारी के तयसुदा आयोजित जनता दरबार में ही पीयूसीएल की जांच रिपोर्ट को सौंपा गया। एसपी की अनुपस्थिति में जिला उपाधीक्षक को जांच रिपोर्ट सौंपा गया है।