औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
कहां सोई है पुलिस? किसके दबाव में है जिला प्रशासन? यह सवाल इसलिए कर रहा हूं कि औरंगाबाद जिले के गोह थानाक्षेत्र अंतर्गत बाजार वर्मा पंचायत स्थित दोवाल गांव में माननीय जिला पार्षद की अनुसंशित योजना “नाला निर्माण” को जबरन रोकने वालों के खिलाफ मौन रहने वाली पुलिस क्या मेरी हत्या के बाद चुप्पी तोड़ेगी? यह इसलिए कह रहा हूं कि दोवाल गांव में ही “शवदाह गृह निर्माण” में लगे मजदूरों को असमाजिक लोगों ने हाथ-पैर तोड़ने की धमकी देते हुए भगा दिया। रात के अंधेरे में धमकाने वाले लंपटों को मजदूर पहचान नहीं पाये। जान के खखन में बिना किसी को बताये ही मजदूर वहां से भाग गये। शुक्रवार को बांस-बल्ला गाड़कर पूरे गांव का रास्ता रोका गया। किसने रोका? जानकारी जिला प्रशासन, अनुमंडल पदाधिकारी के साथ ही अंचल अधिकारी और स्थानीय थाने को भी है। हालांकि उसी दिन दोपहर में जिला प्रशासन के हरकत में आने के बाद अंचल अधिकार द्वारा रास्ता खुलवाया गया। फिर भी कार्रवाई नदारद। जानना चाहता हूं कि आखिर किसके इशारे पर लंपटों की लंपटई जारी है? क्या कानून किसी का मुंह देखकर कार्रवाई करेगा? हर बातों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को है तो फिर किस मुहूर्त का इंतजार कर रहा है जिला प्रशासन और पुलिस? नक्सल के नाम पर गरीबों को तंग करने वाली पुलिस से जानना चाहता हूं कि सरकारी काम में बाधा डालने वालों को लंपट नेताओं के इशारे पर कबतक संरक्षण देते रहेंगे आप? ऐसे में तो मेरी हत्या भी हो सकती है! क्या मेरी हत्या के बाद ही आला अधिकारियों की नींद खुलेगी? मुझे भी लगातार धमकाया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी भी दे चुका हूं। असमाजिक लोगों को मिलने वाले पुलिसिया संरक्षण के डर से इलाका छोड़ दूं या फिर आत्महत्या कर लूं! 24 घंटे के अंदर ऐसे लंपटों पर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हुई तो सत्ता संरक्षित नेता-अपराधी-अधिकारी गंठजोर के खिलाफ बुधवार, दिनांक-17 जून से गोह के प्रखंड कार्यालय प्रांगण में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करूंगा। दुश्मन की गोली से मरने से अच्छा है सत्याग्रह करते हुए शहीद हो जाना। समाज के प्रगतिशील जमात के लोगों से अनुरोध होगा कि जुर्म-अत्याचार-अन्याय के खिलाफ एकजुटता का परिचय देने की कृपा करें।
