हंगामा के भेंट चढ़े संसद के मानसून सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित, नहीं हुई चर्चा, 175 करोड़ रुपए का लगा चुना, जिम्मेवार कौन?

केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा

संसद के मानसून सत्र 2026 आज 13 अगस्त को हंगामा के भेंट चढ़ अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक यानी 24 दिनों में लोकसभा में मात्र 15.6घंटे और राज्य सभा में मात्र 24.3 घंटे ही कार्य हुए। फलस्वरूप कई महत्वपूर्ण विधेयक (कानून ) पर कोई बहस अथवा चर्चा नहीं हुई। इस अवसर पर जनता के टैक्स के 175 करोड़ रुपए पानी के तरह बहा दिया गया। बताते चलें कि संसद सत्र के लिए प्रति मीनट 2.5(ढाई लाख रुपए) और प्रति घंटा 1.5(डेढ़ करोड़ रुपए) ख़र्च होता है। इसमें सांसदों के वेतन भत्ते,संसद सचिवालय के प्रशासनिक और कर्मचारी ख़र्च,भवन की सुरक्षा, बिजली और तकनीकी रख रखाव तथा सत्र के दौरान लाइव प्रसारण एवं अन्य व्यवस्थाएं शामिल है। यह ख़र्च जनता के टैक्स वसूली कर ख़र्च किया जाता है। लेकिन जब संसद सदस्यों द्वारा जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं होना जनता के साथ धोखाधड़ी नहीं तो और क्या है कहा जा सकता है? अब सवाल यह है कि आखिर संसद नहीं चलने के लिए जिम्मेवार कौन है यह भी एक सोचनीय विषय है।  सत्ता पक्ष विपक्ष को और विपक्ष सत्ता पक्ष को जिम्मेवार कह रहा है। लेकिन जब संसद हंगामा के भेंट चढ़ रहा था तो हंगामा का मूल कारण था कि विपक्ष यह मांग कर रहा था कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री संसद में पहले जवाब दें कि देश में छात्र -युवाओं पर आंदोलन के दौरान AK47, पैरोट गन का इस्तेमाल किसके आदेश पर चला? लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने जिस तरह संसद परिसर स्थित अपने कार्यालय में बैठे रहे और विपक्ष के बार बार मांग को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ठुकराते रहे इससे संसद में हंगामा बढ़ता गया और अंततः आज संसद अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया।