नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
नवादा जिले में वर्षों से कार्यरत चतुर्थ वर्गीय उम्मीदवार अनुसेवकों का स्थायीकरण की मुख्य एक सूत्री मांग को लेकर आंदोलन शांतिपूर्ण जनतांत्रिक तरीके से धाराप्रवाह लंबे अरसों तक प्रभावकारी ढंग से जारी रहा। आंदोलनकारी के दृढ़ता और साहस का बेहद दाद देना चाहिए,जो

काबिलेतारिफ है। नवादा समाहरणालय एवं अन्य विभागों में कई दशकों से कार्यरत उम्मीदवार अनुसेवकों का स्थायीकरण नहीं करने को लेकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन एवं धरना चरणबद्ध तरीके से नवादा समाहरणालय के समीप मशहूर रैन बसेरा में लंबे समय तक जारी रहा। इस प्रभावकारी धारावाहिक आंदोलन से तत्काल प्रभावित होकर उच्च न्यायालय , पटना ने संज्ञान लेकर मगध प्रमंडल के आयुक्त को अपने आदेश का पालन करने का निर्देश जारी किया है। इसी के आलोक में आयुक्त,गया जी कार्यालय मगध प्रमंडल की ओर से नवादा जिलाधिकारी को पटना हाईकोर्ट के आदेशानुसार-
ज्ञात हो कि पत्रांक संख्या : ।।। ,स्था. 14/2025 : 2654.
आयुक्त कार्यालय मगध प्रमंडल, गया जी के अधिकारी द्वारा।
प्रेषक : – आयुक्त के सचिव, मगध प्रमंडल,गया जी,बिहार।
विषय : – नवल पासवान और दिलीप कुमार द्वय द्वारा दिनांक 13.05.2026 को दीए गए संयुक्त अभ्यावेदन के बारे में।
महाशय ,
उपर्युक्त प्रासंगिक अंकित विषयक नवल पासवान और दिलीप कुमार के तत्वाधान में संयुक्त अभ्यावेदन के आलोक में दिनांक: 13.05.2026 को इस कार्यालय को प्राप्त हुआ है, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक : 12.02.2026 ( छायाप्रति संलग्न ) के आलोक में न्यायोचित सुनवाई व करवाई किए जाने के लिए तत्कालीन पहलकदमी उठाने हेतु नवादा जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है।
अतः प्राप्त आवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए निदेशानुसार अनुरोध है कि पत्र में लिखित तथ्यों तथा माननीय उच्च न्यायालय,पटना द्वारा पारित संबंधित आदेश के आलोक में उचित नियमानुसार आवश्यक कारवाई करने की कृपा की जाय।
अनुलग्नक : अथोकत ।
लेकिन, बेहद दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि कई ऊपरी आदेश को लागू करने में निकृष्ट आनाकानी व लापरवाही का क्रूर अमानवीय परिचय देने में अग्रिम कतार एवं भूमिका में मुंहवाये ये निठल्ले खड़े कुकुरमुत्ते की तरह दिखते हैं। सरकारी महत्वपूर्ण ऊपरी आदेश को ठेंगा दिखाके घोर अवहेलना क्यों किया जा रहा है ? इसके पीछे अंतर्निहित नापाक मंशा आखिर क्या है ? इन मासूमों एवं उनके परिजनों के जिंदगी के साथ अमानुषिक दुर्व्यवहार आखिर किस मंशा से बेशर्मी से किया जा रहा है।
उम्मीदवार अनुसेवकों सह चतुर्थ वर्गीय अस्थाई कर्मचारियों की स्थायीकरण उच्च न्यायालय, पटना के निदेशानुसार सार्थक व सकारात्मक पहल को न्याययुक्त व्यवहारिक अमलीजामा पहनाने के उचित कानूनी कारवाई करें । जिला प्रशासन को माननीय उच्च न्यायालय, पटना के निदेश का अक्षरशः पालन करना चाहिए। इसमें अगर ढिलाई दी गई या निष्ठा और ईमानदारी पूरी नहीं की गई तो आख़िरी बार अब उम्मीदवार अनुसेवकों द्वारा आर-पार यानी मरो अथवा मारो की जंग के अटल निर्णायक दौर में अडिग व अटल खड़ा रहेंगे। अगर समय रहते जिला प्रशासन ठोस पहलकदमी लेने में कहीं पिछड़ गया तो समझौताहीन झंझावात संघर्ष के अनमोल इतिहास में यह तब्दील होगा। क्योंकि, यह सर्वविदित कड़वी सच है कि मरता क्या नहीं करता ? भावी परिणामों के लिए जिम्मेदार सिर्फ़ आप और आपकी सरकार ही होगी।

