दाउदनगर/ औरंगाबाद: अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्रखंड अंतर्गत शमशेर नगर में बने अतिप्राचीन शमशेर खां का मुकाबरा आज सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। हालांकि बिहार सरकार और पर्यटन विभाग के सूचि में यह ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में शामिल है और इसका देख-रेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के द्वारा किया जाता है। जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक मकबरा का निर्माण 18वीं सदी के शुरुआत में 1701-1702 के आसपास हुआ था। ऐतिहासिक स्रोतों और अभिलेखों के अनुसार शमशेर खां (मूल नाम इब्राहिम खान) ने स्वयं कराये थे। शमशेर खान के चाचा और बिहार के पूर्व सुबेदार दाऊद खान कुरैशी ने भी इस मकबरे का निर्माण में मुख्य भूमिका निभाये थे।और शमशेर खां व उनके बेगम के लिए उनके जिवित रहते ही बनवाये थे। लेकिन आज यह ऐतिहासिक मकबरा सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के द्वारा उचित देखभाल और रख रखाव के अभाव में अपने दुर्दशा पर आठ आठ आंसू बहा रहा है। जानकारी के अनुसार 2025 में कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा मजार को आंशिक क्षती भी पहुंचाया था। जिसका स्थानीय लोगों द्वारा कड़ा विरोध किया गया। मजार को क्षती पहुंचाने का सूचना पर जांच के लिए एस आई टी भी गठन किया गया था लेकिन आज भी यह मकबरा उपेक्षित है।
