जदयू में घमासान से सियासी पारा आसमान पर, क्या प्रदेश अध्यक्ष के कारवाई भी असंवैधानिक


पटना संवाद सूत्र ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा



एमएलसी चुनाव में अपने ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध और जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन करने के मामले में मोकामा के बाहुबली जदयू विधायक अनंत सिंह को विरुद्ध जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा पार्टी से छः वर्षों के लिए निष्कासित करने और विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का अनुसंशा विधानसभा अध्यक्ष को किया गया है। साथ ही पूर्व

जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह

विधायिका और अनंत सिंह के पत्नी को भी छ: वर्षों के लिए निष्कासित प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किया गया है। पार्टी द्वारा निष्कासित करने का नोटिस निकलते ही जहां प्रदेश में सियासी पारा गर्मा गया है वहीं अनंत सिंह और उनके समर्थकों द्वारा पटाखा छोड़कर जश्न मनाया गया। बिहार या कहुं की देश में पहली घटना है कि जब पार्टी द्वारा किसी विधायक को निष्कासित किया गया हो तो विधायक और उनके समर्थकों द्वारा पटाखा छोड़कर जश्न मनाया गया है।एक तरफ़ जहां सियासत गर्मा गया है वहीं प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा किए गए कारवाई को वैधता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारों को मानें तो जदयू के संविधान के अनुच्छेद 19 में उल्लेख है कि पार्टी के किसी भी विधायक के विरुद्ध कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष नहीं बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा। जहां तक कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का सवाल है तो पार्टी संविधान में कार्यकारी अध्यक्ष का कोई पद सृजित नहीं है। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ही विधायक के विरुद्ध कारवाई करने के लिए सक्षम हैं। लेकिन नीतीश कुमार द्वारा कारवाई अभी तक नहीं किया गया है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि यदि अनंत सिंह पार्टी के विरुद्ध एमएलसी चुनाव में कार्य कर रहे थे तो अब प्रदेश अध्यक्ष भी पार्टी संविधान के विरुद्ध कार्रवाई किये हैं। जब अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी कारवाई का आरोप है तो क्या प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा पर भी पार्टी संविधान के विरुद्ध कार्रवाई किया गया तो उनके विरुद्ध भी कारवाई होगा?