औरंगाबाद: ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में कृषि महाविद्यालय के लिए हसपुरा प्रखंड के डींडीर गांव में कूल 37.5 एकड़ भूमि चयनित भूमि अभी तक जानकारी के अनुसार कृषि विभाग को हस्तांतरित नहीं हो सका है। तीन वर्षों में भी भूमि का हस्तांतरण नहीं होने के लिए आखिर जिम्मेवार और लपरवाह कौन हैं यह सवाल जिलावासियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों में केवल किसी काम का

क्रेडिट लेने का होड़ लगा हुआ है। लेकिन जिले के ज्वलंत मुद्दों पर कोई न तो प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित हो रहा है और नहीं कोई चर्चा और प्रयास। ज़िले के सभी विभागों में भ्रष्टाचार और अनियमितता व्याप्त है। प्रधानमंत्री आवास योजना में जिस तरह मनमानी एवं धांधली उजागर हुआ है और जरुरतमंद लोगों को सूचि से बाहर रखा गया है इसके लिए जिम्मेवार लोगों के विरुद्ध अभी तक जिला प्रशासन और सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिले में फर्जी प्रमाण पत्र पर नियोजित शिक्षकों का बाढ़ है और ये लोग शिक्षा ब्यवस्था को पंचर तो कर ही रहे हैं साथ ही सरकार के खज़ाना को भी चुना लगा रहे हैं, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा सरकार द्वारा कोई कार्रवाई करने के बदले बचाया जा रहा है, जिले के अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार साफ़ जाहिर है फिर भी नहीं कारवाई और नहीं रोक थाम के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। आश्चर्य तो यह है कि आखिर क्रेडिट लेने वाले नेता और जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं? इसके लिए आखिर प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं कर रहे?

