औरंगाबाद ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
जनता दल ( यू ) में इन दिनों भगदड़ मचा हुआ है। पार्टी में मचे भगदड़ के बीच शीर्ष नेतृत्व पंगु और लचार व बेसहारा बना हुआ दिखाई दे रहा है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लेकर औरंगाबाद तक पार्टी में बच्चे भगदड़ प्रदेश के राजनैतिक तापमान चरम पर चढ़ गया है। 4 अक्टूबर (रविवार ) को औरंगाबाद के गांधी मैदान में राजद का मिलन समारोह में रफीगंज से दो बार जदयू के विधायक रहे अशोक सिंह ने राजद के कार्यकारी अध्यक्ष व बिहार विधानसभा में नेता प्रतीपक्ष तेजस्वी यादव के समक्ष पूर्व विधायक ने न

सिर्फ राजद के दामन थाम लिये बल्कि उन्होंने अपने संबोधन में विरोधियों को खुब खरी खोटी सुनये। पूर्व विधायक अशोक ने दहाड़े हुए कहे कि जब से सुनें हैं कि मैं राजद में शामिल होने वाले हैं तो पेट दर्द कर रहा है वैसे लोगों को पेट का दर्द और बढ़ा देना है। उन्होंने आगे कहा कि मैं कोठी के राजपूत नहीं बल्कि झोपड़ी के राजपूत हूं। दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े समाज के लोग भी मेरे साथ हैं और रहेंगे। जब लालू प्रसाद और राजद के सहयोग से आप राजनीति करें तो ठीक और मैं करु तो पेट दर्द। अशोक ने तेजस्वी यादव को याद दिलाते हुए कहे कि 1990 में मेरे पिता जी (रामाधार सिंह) जब गया जिले के गुरुआ से निर्दलीय विधायक बने तो उन्होंने लालू प्रसाद यादव को समर्थन किये थे। आज मैं जब पुनः अपना घर वापसी कर रहा हूं और मेरे लिए अब अंतिम और आखिरी पार्टी राजद होगा। मैं जो कहता हूं वही करता हूं। मिलन समारोह को संबोधित करते हुए नेता प्रतीपक्ष तेजस्वी यादव ने मंच से खुब दहाड़े। तेजस्वी ने जहां पीएम मोदी और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश पर जम कर हमला किये वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला किये। सीएम सम्राट को अपराधि कहते हुए कहे कि सीएम पर सात अपराधिक मुकदमा दर्ज है। नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ वाला फोटो वायरल करने के लिए जिम्मेवार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर अविलम्ब पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज बिहार पुलिस का दोहरा चरित्र भी उजागर हो रहा है। जब विडियो वायरल करने के विरुद्ध आम लोगों पर मुकदमा दर्ज हो सकता है तो फिर मुख्यमंत्री पर क्यों नहीं। औरंगाबाद में जदयू में मचे भगदड़ औरंगाबाद में पुराने राजनैतिक समिकरण को ध्वस्त होने और नया समिकरण उदय होगा यह राजनैतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म होने लगा है। वहीं पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अनन्त सिंह का बागी तेवर और अभी तक जदयू के शिर्ष नेतृत्व में खामोशी यह दर्शा रहा है कि जदयू अब असहाय लाचार व बेवस बन चुकी है।
