असीम आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है रफीगंज के वरुणा स्थित ठाकुर बाड़ी

सुनील कुमार सिंह/ अम्बुज कुमार की रिपोर्ट


” जापर कृपा रघुनाथ के, वो अनाथ कैसे होई ” वाली कहावत को चरितार्थ करता है – रफीगंज प्रखंड़ के ग्राम वरुणा स्थित ठाकुर बाड़ी । ठाकुर बाड़ी के महंथ रौशन जी महाराज की मानें तो इस ठाकुर बाड़ी की स्थापना ग्रामिणों के सहयोग से 60 के दशक में की गयी थी । मंदिर परिसर में राम दरवार, शिव परिवार, बजरंग बली की मुर्तियाँ स्थापित है। हलाँकी ठाकुर बाड़ी के नाम से कोई जोत -जमीन रजिस्टर्ड नहीं है, फिर भी ग्रामिणों के सहयोग से पूजा – भोग की व्यवस्था पूजारी सह महंथ जी की देख- रेख में नियमित संचालित होते रहता है। ग्रामिण सीरीज शर्मा, आलोक शर्मा, अजय शर्मा, गुंजन शर्मा, भुवनेश्वर शर्मा, कुंदन शर्मा, संतोष नागा कि मानें तो ठाकुर जी की शास्वत कृपा इस गाँव पर बनी रहती है। आयोजित भण्ड़ारा में कभी भी प्रसाद की कमी नहीं होनें पाया है। 1970 की दशक में जब इस इलाका में नक्सलियों का बोलबाला था तब ग्रामिण एक जुट होकर अपनी गाँव की रक्षा किए हैं। ग्रामिणों की एकता एवं सजगता के फलस्वरूप नक्सलियों की एक नहीं चली थी । अभी बिल्कुल ही अमन – चैन एवं शांति का माहौल कायम है । तभी तो ग्रामिण नित्य रात्री को ठाकुर बाड़ी में एकत्र होकर स्थानिय वाद्ययंत्रों की घुन पर घंटो भजन – कीर्तन में लीन रहते हैं। इन भक्तों का एक ही ध्येय वाक्य बन गया है – – ” जो राम के भजे, सो राम के होई ” ।