नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
नवादा जिले में उत्पाद विभाग के पुलिस द्वारा अवैध कमीशनखोरी के सिर्फ चक्कर में छापेमारी के बहाने नारदीगंज थाना के अंतर्गत इचुआ गांव में मुंद्रिका मांझी एक गरीब मेहनतकश मजदूर की बर्बर पटाई से संदिग्ध मौत के बाद भारी बवाल मच गया है। शनिवार को हुई इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शराब की छापेमारी के दौरान उत्पाद विभाग की टीम ने मुंद्रिका मांझी की बेरमी से बर्बर जानलेवा बर्बर पिटाई की, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी हत्या हो गई। इस मौके पर उत्पाद विभाग के हत्यारे पुलिस के खिलाफ जमकर जबर्दस्त नारेबाजी की गई। मृतक बेकसूर निरीह मासूम कुलदीप मांझी के बेटा मुंद्रिका मांझी के परिजनों का साफ़ व सीधा आरोप है कि उत्पाद विभाग की टीम ने शराब की छापेमारी के दौरान मुंद्रिका मांझी की बेरहमी से पटाई की, जिससे मुंद्रिका मांझी की मौत हो गई।आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई। तकरीबन दो घंटे तक जाम रहने से वहां पर पूरा अफरा तफरी मचा रहा। वहीं, सड़क के दोनों किनारे वाहनों की लम्हड़ कतारें लग जाने के चलते सभी तरह के वाहनों का परिचालन पूर्णतः बंद रहा और यात्रीगण काफी परेशान रहे।
सड़क जाम की सूचना को मिलते ही थानाध्यक्ष राजेश कुमार,बीडीओ सोनिया ढनढनिया, मुखिया शशि भूषण कुमार,मानवाधिकार से जुड़े लोक स्वातंत्र्य संगठन ( पीयूसीएल) के राष्ट्रीय पार्षद दिनेश कुमार अकेला आदि ने उक्त मौके पर पहुंच कर वहां बेकाबू होते स्थिति को मौक पर संभाला।वहीं पर BDO ने कहा कि पीड़ित परिवार को आवास योजना का लाभ समेत अन्य सरकार प्रदत लाभकारी प्रावधन के तहत सुविधाऐं दिया जाएगा। बीडीओ द्वारा सरकारी लाभ व सहायता के साथ ही आवास योजना के आश्वासन तथा थानाध्यक्ष द्वारा लिखित शिकायत पर उचित कानूनी कारवाई के भरोसा देने के बाद ही दोपहर करीब एक बजे अपराह्न सड़क जाम को वहां से हटाया जा सका, जिसके बाद लोगों ने थोड़ा राहत की सांस ली है।
ज्ञात हो कि इधर,मृतक की पत्नी मंजू देवी ने थाने में लिखित आवेदन पत्र समर्पित कर मामला दर्ज कराया है। थाना को दिए आवेदन पत्र में कहा गया है कि हमारे पति खेती के काम में इचुआ गए हुए थे। उसी समय उत्पाद विभाग की टीम वहां छापेमारी के लिए पहुंची। उत्पाद पुलिस की टीम को देखकर लोगों में भारी भगदड़ मच गई,लेकिन निर्दोष मुंद्रिका मांझी वहीं पर रह गए। तभी उत्पाद विभाग के पुलिस ने बिना पूछे उसके साथ क्रूर ढंग से मारपीट की अंतहीन सिलसिला शुरू कर दिया। लाठी, डंडा और लात जूतों से बेरहमी से निर्ममता पूर्वक पिटाई की गई। इतना ही नहीं, बल्कि जूता पहने मुंद्रिका मांझी के सीने पर चढ़कर मसल एवं रौंद डाला।इससे भी उत्पाद पुलिस की मन नहीं भरा तो बंदूक के कुंदे से मुंद्रिका मांझी के नाजुक अंगों पर कठोर प्रहार राक्षस की तरफ हृदयहीनता से क्रूरतापूर्वक करता रहा। मृतक की पत्नी ने बताया कि बर्बर अमानुषिक बेरहम पिटाई के कारण ही उनके पति मुंद्रिका मांझी ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। मात्र मजदुरी कर परिवार चलाने वाले मुंद्रिका मांझी अपने पीछे 06 छोटे नाबालिग बच्चों को छोड़ गए हैं। अब इस गरीब परिवार के पालन-पोषण लेकर मृतक के परिवार और ग्रामीण काफी चिंतित व बेचैन हैं।
इधर,उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उत्पाद विभाग की जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि शराब निर्माण की सूचना पर छापेमारी के लिए एक टीम इचुआ गांव स्थित बगीचे में पहुंची थी। उस स्थान पर जलती हुई शराब की भट्टी पाई गई थी। बगीचे के बाहर 3-4 लोग बैठे हुए थे।उन लोगों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे सभी किसान हैं और उनके पास खंती और कुदाल भी था। हालांकि उस बगीचे में 3080 किलो जावा महुआ घोल एवं 215 लीटर चुलाई शराब बरामद किया गया। उसके कुछ नमूने को जप्त करते हुए शेष को वहीं पर विनष्ट कर दिया गया।इस पूरी कारवाई को पटना के कंट्रोल रूम से ड्रोन के जरिए सीधा प्रसारण के रूप में देखा जा रहा था और मोबाइल पर वीडियो भी बनाई गई है। भाकपा,माकपा समेत तमाम वामपंथी दलों एवं समाजवादी चेतना से जुड़े लोगों ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे बिहार के सम्राट चौधरी सरकार की बड़ी खूनी दरिंदगी का एक जीता जागता प्रत्यक्ष प्रमाणित प्रमाण नहीं तो और क्या है ?
