नवादा से डीके अकेला की रिपोर्ट
सम्पूर्ण देश के अंतर्गत जिस्मफरोशी की धंधे तो धड़ल्ले से बेरोकटोक पुलिस, प्रशासन और डबल ईंजन की सरकार के सह व संरक्षण में ही दिन दुगुना और रात चौगुना फल फूल रहा है। ईसका सबसे ताजा प्रत्यक्ष प्रमाण है कि नौकरी का लोभ देकर लड़कियों को जॉब के नाम पर ले जाकर बंधक बनाकर फिरौती मांगने वाले एक शातिर अपराधिक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जिले के जंगल के रजौली थाना क्षेत्र में आर्थिक,सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से कमजोर व पिछड़े परिवारों की बहु -बेटियों को निशाना बना कर अपहरण व फिरौती मांगने वाले एक गिरोह का खुलासा आश्चर्यचकित और दिल दहला देने वाली है। यह तो मानवता,इंसानियत, न्याय और मानवाधिकार पर घोर सरकार प्रायोजित एक बड़े क्रूर कठोर केन्द्रित कुठाराघात है।
ज्ञात हो कि उक्त शातिर युवतियों का पहले साइबर गिरोह की प्रशिक्षित महिला सदस्य घर- घर जाकर जांव यानी हजारीबाग में पैकिंग के रोजगार से अच्छी कमाई की प्रलोभन देती है । फिर, अपने जाल में फंसाकर किशोरियों को अपने साथ ले जाया करती है। इसके बाद युवतियों को बंधक बनाकर उनके परिजनों से 80 हजार रूपये तक की फिरौती मांगी जाती है, जो एक गरीब रोज कुंआ खोदकर पानी पीने वाले मेहनतकश परिवार के लिए देना बेहद मुश्किल होता है। कितने परिजन तो लोक लज्जा के डर से अधिकतर मामले को थाना न ले जाकर दबा देते हैं।
विदित हो कि एक तो ताज़ा मामले प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में सनसनीखेज हाज़िर है । एक युवती 20 दिनों के बाद अपने परिजनों के अथक सहयोग से और एक भले इंसान मोबाइल दुकानदार की सूझबूझ और अपने मानवीय मूल्यों की विवेक की दहलीज पर निडरता से खड़े होकर मदद करने के चलते उक्त शातिर जालिम अपहरणकर्ता गिरोह के चंगुल से मुक्त होने के बाद सकुशल आज अपनी घर युवती लौटी है।
गिरोह का कहीं पे निशाने और कहीं पर निगाहें टीका रहता है। गिरोह ने एक दिव्यांग माता एवं वृद्ध पिता की लबालिग लड़की को पहले शिकार बनाने में तो सफल रहा। इसका भंडाफोड़ हो चुका है। पीड़ित युवती के परिजनों ने बताया कि तकरीबन 25 दिन पहले सिरदला थाना क्षेत्र की एक ठग युवती ने उनके घर आई ,उसने खुद को उनकी बेटी की सबसे नज़दीकी और * अच्छी सहेली * बताया। गिरोह के सदस्य जानबूझकर लड़कियों को ही लड़की फंसाने के लिए भेजते हैं, ताकी उनके परिजनों को शक तक न हो। पीड़ित का परिवार बेहद गरीब है। घर में परिवार पर आश्रित दिव्यांग माता,वृद्ध पिता व 6 बेटियां हैं।पूरे परिवार जंगल से ढिबरा चुनकर घर परिवार का किसी तरह भरण-पोषण करने को लाचार हैं। लड़की फंसाने वाले गिरोह की लड़की ने उनके परिजनों को हजारीबाग के रसूलीगंज में *सिर्फ सर्फ पैकिंग का काम एवं अच्छी तनख़ाह * का प्रलोभन दिया। परिजनों के मना करने के बाद भी युवती यानी दिव्यांग माता व वृद्ध पिता की बच्ची को अपने साथ हजारीबाग ले गई।
फिर कहना क्या था,गिरोह ने बंधक बनाकर मांगी 80 हजार रुपए की फिरौती। पीड़ित युवती के मुताबिक, वहां उसके पहुंचने के 2-4 दिन बाद ही खाने पीने की घोर दिक्कत शुरू हो गई। निकलने की कोशिश करने पर कड़ा पहरा लगा दिया गया।बीच- बीच में गिरोह के लोगों के सामने परिजनों से फोन पर बात करवाई जाती थी, ताकि उन्हें जरा भी शक न हो सके। कुछ दिन बाद परिजनों के पास फोन आया और बेटी को छुड़ाने के बदले 80 हजार रुपए की मांग की गई। इसी दरम्यान लड़की को मोबाइल ठीक कराने के बहाने कुछ अपहृत लड़कियों के साथ बाजार जाने दिया गया। वहां उसने मोबाइल दुकानदार को दर्दभरा दुखद वेदना की पूरी कहानी बताई और यथासंभव मदद मांगी।
ऐसे बची जान : – हजारीबाग बाजार में मोबाइल ठीक करवाने के बहाने गिरोह की महिलाएं उक्त युवती को बाजार ले गई। युवती ने रोते बिलखते हुए ही दुकानदार को आपबीती दुखड़ा सुनाई।दुकानदार ने चालाकी से उक्त शातिर गिरोह की महिलाएं को इस काम में थोड़ा और समय लगेगा,यह कहकर गिरोह को वहीं उलझाए रखा और तुरंत लड़की के परिजनों को फोन कर दिया। सूचना मिलते ही परिजन हजारीबाग पहुंचे और अपनी बंधक बनी बेटी को सकुशल वापस लेकर आए। परिजनों को डर है किअगर समय पे मोबाइल दुकानदार की मदद न मिलती तो तो उनकी बेटी को कहीं बेच दिया जाता।
अवैध फायदा उठाया जा रहा मजबूरी का : – इस लंपट चोर व ठग अपहरणकर्ता गिरोह का टारगेट- निशाने पर वहीं परिवार हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खराब है। काम के नाम पर मोटी रकम का प्रलोभन दे कर किशोरियों व नवयुवतियों को नौकरी का चारा परोसकर ही फंसाया जाता है। गिरोह में पहले महिला सदस्य होने के कारण तो परिजनों को शुरू में किसी भी संभावित खतरे का अंदेशा नहीं होता है। फिलहाल कई पीड़ित परिवार लोक -लज्जा के कारण थाने में शिकायत दर्ज ही नहीं कराना चाहते।अपहृत बेटी के परिजन बेटी को वापस लाकर फिर से मजदूरी यानी ढिबरा चुनने में जुट गई है। वहीं इसके परिजनों ने बताया कि यदि मौके पर मोबाइल दुकानदार मदद नहीं करता तो उनकी मासूम बच्ची को कहीं बेच दिया गया होता।
इस संवेदनशील मामले के संदर्भ में रजौली अनुमंडल के इंस्पेक्टर रणजीत कुमार ने कहा कि यदि पीड़ित परिवार लिखित शिकायत देता है,तो उक्त मामले की जांच कर गिरोह के विरुद्ध कड़ी से कड़ी करवाई शुरू की जाएगी। साथ ही पुलिस आम आदमी से अपिल भी कर रही है कि किसी अनजान वअपरिचित व्यक्ति के प्रलोभन या झांसे में आकर बच्चे या बच्चियों को कहीं बाहर काम पर नहीं भेजें तथा संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।


