फर्जी शिक्षकों का जांच का खानापूर्ति, 12वर्ष में मात्र 3 प्रतिशत फर्जी शिक्षक आए पकड़ में, 75 हज़ार फ़ोल्डर ग़ायब, बीईओ से लेकर डीईओ तक हुए मालोमाल


पटना संवाद सूत्र ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा


बिहार में सुशासन और कानून का राज तथा भ्रष्टाचार मामले में जीरो टॉलरेंस का असलियत उजागर करने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र पर नियोजित शिक्षकों का निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा चलाया जा रहे जांच के स्थिति उजागर करने के लिए काफी है। बताते चलें कि 2014 से पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर 206से 2015 तक हुए शिक्षक नियोजन का जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो कर रहा है। जानकारी के अनुसार जांच में अभी तक लगभग 200निगरानी विभाग के एसपी से लेकर सिपाही तक लगे होंगे। लेकिन परिणाम अभी फिसीड साबित हो रहा है। आश्चर्य जनक पहलू यह है कि 12वर्ष में अभी तक मात्र तीन हजार 35 शिक्षक ही फर्जी पकड़े गए हैं तथा मात्र 1,830 फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई है। जबकि 75 हज़ार नियोजित शिक्षकों का फोल्डर (फाईल) ग़ायब है। इस संबंध में लोगों का आरोप हैं कि फर्जी शिक्षकों को बचाने में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी तक करोड़पति बन गये हैं।जांच में शामिल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारी भी मालो माल हो रहे हैं। यदि पुरे मामले का जांच पारदर्शिता पूर्ण और इमानदारी से हो तो निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तथा शिक्षा विभाग का भी चेहरा बेनकाब हो जायेगा और तब बिहार में सुशासन कानून का राज और भ्रष्टाचार मामले में जीरो टॉलरेंस का असलियत उजागर हो जायेगा।