औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
लगता है कि बिहार विधान सभा के नाम पर फेकन्यूज चलाकर मेरा चरित्र हनन कोशिश की गयी है। क्योंकि 4 दिन पहले प्रमोद चंद्रवंशी ने अपने फेसबुक पर बिहार विधान सभा की अधिसूचना प्रकाशित किया था। उस अधिसूचना में उसकी प्रतिलिपि मुझे उपलब्ध कराने की बात लिखी हुई है।

जबकि अभी तक मुझे उपलब्ध नहीं कराया गया है। बिहार विधान सभा के बेवसाइट पर भी वह अधिसूचना नहीं मिल रहा है। इस संबंध में बिहार विधान सभा सचिवालय को पत्र लिखा है।

सेवा में,
प्रभारी सचिव
बिहार विधान सभा, पटना।
विषय:- बिहार विधान सभा की अधिसूचना सोशल साईट पर जारी होने के संबंध में।
महोदया,
प्रमोद चंद्रवंशी नामक एक ब्यक्ति अपने फेसबुक पर दिन- शुक्रवार, दिनांक- 22/05/2026 को समय 17:48 बजे यानी शाम 5 बजकर 48 मिनट पर एक सूचना प्रसारित एवं प्रचारित किये हैं। जिस पर अनुकूल-प्रतिकूल टिप्पणिया भी दर्ज है। इसके अवलोकन से ज्ञात होता है ये बिहार विधान सभा की एक अधिसूचना है जो उसी दिन यानी दिन- शुक्रवार, दिनांक- 22/05/2026 को जारी हुआ है। इस अधिसचना में माननीय पूर्व सदस्य, बिहार विधान सभा श्री सोम प्रकाश की सदस्यता रद्द करने संबंधित विस्तृत विवरण लिखा हुआ है। इस अधिसूचना की प्रतिलिपि माननीय पूर्व सदस्य, बिहार विधान सभा श्री सोम प्रकाश को उपलब्ध कराने हेतू लिखा गया है। मेरा मोबाईल नंबर एवं ईमेल बिहार विधान सभा के रेकॉर्ड में उपलब्ध है। परंतु 4 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक इस अधिसूचना की प्रति मुझे प्राप्त नहीं हुई है। जबकि इस अधिसूचना की प्रतिलिपि प्रमोद चंद्रवंशी नामक एक ब्यक्ति को दिये जाने की बात भी नहीं लिखी हुई है। फिर उन्हें इसकी प्रतिलिपि उसी दिन कार्यालय अवधि में उपलब्ध करा दी गयी है। चूँकि इस अधिसूचना की जारी होने की तिथि 22/05/2026 है और प्रमोद चंद्रवंशी नामक एक ब्यक्ति उस अधिसूचना की प्रति को उसी दिन शाम 5 बजकर 48 मिनट पर अपने फेसबुक पर डाल देता है। उस फेसबुक पर टिप्पणी से मुझे एवं मुझसे भावनात्मक लगाव रखने वाले लोगों को मानसिक आघात पहुँचा है और मान-सम्मान को धक्का लगा है।
मेरी समझ में बिहार विधान सभा की अधिसूचना एक शासकीय पत्र है जिसे बिहार गजट में प्रकाशित किया जाता है। जब मैंने बिहार विधान सभा की बेवसाईट पर चेक किया तो भी यह अधिसूचना नहीं मिली। उस अधिसूचना की प्रति संबंधित ब्यक्ति को उपलब्ध कराये जाने के बजाय किसी तीसरे ब्यक्ति को उपलब्ध कराया जाना मेरी समझ से परे है। इससे प्रतीत होता है कि यह अधिसूचना गलत है। प्रमोद चंद्रवंशी द्वारा अपने फेसबुक पर प्रचारित एवं प्रसारित किये जारी बिहार विधान सभा की अधिसूचना की प्रति इस पत्र के साथ संलग्न करते हुए आग्रह है कि इसकी जाँच की जाये।
- क्या यह अधिसूचना नकली तो नहीं है? क्योंकि आजकल फेसबुक पर फेक न्यूज चलते रहता है। यदि यह अधिसूचना गलत है तो फिर संबंधित ब्यक्ति के खिलाफ उचित कारवाई करते हुए मुझे भी अवगत कराया जाये।
- यदि यह अधिसूचना सही है तो फिर संबंधित ब्यक्ति को इतने दिनों तक क्यों नहीं उपलब्ध करायी गयी और किसी तीसरे ब्यक्ति को किस नियम एवं कानून के तहत हस्तगत कराया गया।
संलग्नक:- प्रमोद चंद्रवंशी के फेसबुक एवं उस पर जारी अधिसूचना की प्रति।
प्रतिलिपि:- माननीय अध्यक्ष, बिहार विधान सभा को सूचनार्थ एवं आवश्यक कारवाई हेतू प्रेषित।