केन्द्रीय न्यूज डेस्क ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
बिहार में शराब किनून समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने और सुशासन तथा कानून का राज स्थापित करने के उद्देश्य से महिलाओं की मांग पर किया गया था। लेकिन शराबबंदी कानून कभी भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका।आए दिन प्रदेश में शराब बरामद होते रहा है। जिससे शराबबंदी कानून पर सवाल उठते रहा है। बताते चलें कि गांव से लेकर शहरों तक शराब का धंधा जोरों से फल फूल रहा है। लेकिन अब तो

पटना के सचिवालय और बक्सर डीटीओ आफीस में शराब बरामद हो रहा है। जब राज्य के राजधानी में सचिवालय और डीटीओ कार्यालय बक्सर में शराब बरामद हो रहा है तो शराबबंदी कानून पर सवाल उठाने वाले चाहे केन्द्रीय मंत्री जितन राम मांझी हों या जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर या फिर अन्य लोगों का सवाल के औचित्य पर मुहर लग रहा है। बताते चलें कि कुछ वर्ष पूर्व औरंगाबाद सदर अस्पताल में भी शराब के बोतल बरामद हुआ था और मिडिया के शुरखियो में था। जानकारी के अनुसार शराबबंदी कानून को बीफल करने में सरकारी बाबुओं का भी बड़ा योगदान रहा है और कानून को शक्ति से लागू कराने का जिम्मेवारी उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के कंधों पर है लेकिन जो रक्षक वहीं भक्षक बन चुके हैं और शराब कारोबारियों से गहरा पैठ बना इस कानून को धज्जी उड़ा रहे हैं।