आजादी के बाद भी सांसद व विधायक ने किया है महादलितों को उपेक्षा, बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हुआ उपलब्ध, वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल हो रहे महादलित


औरंगाबाद: खबर सुप्रभात समाचार सेवा


औरंगाबाद जिले के अति नक्शल प्रभावित मदनपुर प्रखंड के दो दर्जन से अधिक वैसे महादलित व पिछड़े वर्ग के आबादी वाले गांव है जहां आजादी के बाद से आज तक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो सका है। इन गांवों के साथ सौतेलापन ब्यवहार आजादी के बाद से ही होते रहा है। फलस्वरूप बुनियादी सुविधाएं जैसे प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल आपूर्ति का भी ब्यवस्था नहीं हो सका है। इसके लिए जहां शासन -प्रशासन पुरी तरह से तो जिम्मेवार हैं लेकिन यदि सबसे ज्यादा गुनाहगार स्थानीय सांसद और विधायक हैं। जानकारी के अनुसार आजादी के बाद से आज तक जितने भी यहां से सांसद और विधायक बने सभी ने इन गांवों को उपेक्षित रखने का कार्य किये हैं और अपना निधी से किसी तरह का बुनियादी विकास का कार्य नहीं करा सके हैं। पहले तो कहा जाता था कि नक्शलियो द्वारा विकास कार्यों में बाधा खड़ा किया जाता है इस लिए विकास नहीं हो रहा है लेकिन अब तो सरकार भी दावा कर रही है कि नक्शलियो का खात्मा हो गया है और सच्चाई भी है कि इन इलाकों से में अब नक्सलियों का गतिविधियां थम गई है। लेकिन जब नक्सलियों का सफाया हो गया तो अब इन गांवों का विकास क्यों नहीं हो रहा है। स्थानीय सांसद और विधायक अभी भी इन महादलित व पिछड़े वर्ग के साथ आखिर सौतेलापन ब्यवहार क्यों कर रहे हैं। बताते चलें कि इस इलाके का विधायक जदयू के हैं जो दलितों के सहारे चल रही है पार्टी है। सांसद भी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के हैं और इनका समाजिक न्याय मूल मिशन है। फिर भी इन लोगों द्वारा उपेक्षित रखने का मतलब यह साबित करता है कि केवल वोट बैंक के लिए इन दलितों और पिछड़ों को इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रखंड के महादलित टोला भेली बिगहा, महराजगंज,भितर दोकरी,बादम, धोबी बिगहा,आजाद बिगहा,मैन बिगहा,कनोदी,छेछानी,टिकवा स्थान,बरवा डीह, मदारपुर, डिप्टी बिगहा,पिरवां चरैया, मुडगाडा आदि दर्जनों गांव बुनियादी सुविधाओं से अछुत बने हुए हैं। आश्चर्य तो यह है कि सामाजिक कार्यक्रमों और शादी विवाह के लिए एक सामुदायिक भवन भी यहां नसीब नहीं हो सका है।