” आस्था का असर या अंध विश्वास का खेला, महुआधाम सहित जिले में  लगता है भूतों का मेला “

औरंगाबाद: अम्बुज/ सुनील कुमार सिंह की रीपोर्ट


नवरात्रा में औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा प्रखंड़ के सिरा सराय गाँव स्थित महुआधाम काफी चर्चित रहता है। यहाँ लोग प्रेत बाधा, शारीरिक एवं मानसिक परेशानी, असाध्य रोगों से मुक्ति एवं छुटकारा हेतु आते हैं। वर्ष में दो बार शरदीय नवरात्रा एवं चैत नवरात्रा में महुआ धाम में काफी भीड़ रहती है। लोग आसपास के जिले सहित झारखण्ड़, छतीसगढ़ राज्यों से भी बड़ी संख्या में ईलाज करानें एवं स्वास्थ्य लाभ

होनें की कामना लेकर आते हैं। यहाँ श्रृंखला बद्ध तीन महुआ का वृक्ष होनें से इस जगह का लोग महुआ धाम के नाम से जाननें लगे । लोगों में ऐसी मान्यता है कि इन महुआ के वृक्षों में इतनी शक्ति है कि प्रेतबाधा एवं असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है। असाध्य रोगों से ग्रसित रोगी तथा प्रेत बाधा से वाधित व्यक्ति इस धाम में कई – कई दिनों का कल्प वास भी करते हैं। रोज सवेरे स्नानकर महुआ के वृक्ष के नीचे बैठकर देवी माँ का ध्यान लगाते हैं । इसी बीच देवी माँ की सवारी इन भक्तों के उपर सवार हो जाती है, तथा प्रेतबाधा से ग्रसित व्यक्ति झुमनें,चिल्लानें तथा विचित्र तरह की हरकतें करनें लगता है। यहाँ विराजमान भगत इनके शरीर के उपर अभिमंत्रीत चावल का छिंटा मारते हैं और तरह – तरह के धुन में देवी माँ के पचरा गाना शुरू कर देते हैं। प्रेत – बाधा से ग्रसित व्यक्ति अपनें शरीर को जोर – जोर से पीटने तथा गोल – गोल मुंड़ी घुमानें लगता है । जिसे यहाँ की भाषा में देवी माँ की सवारी का आगमन तथा भूतों का खेलना कहते हैं। यह दृश्य सैंकड़ो की संख्या में देखनें को मिलती है। क्या इसे भक्तों की आस्था या अंध विश्वास का खेला कह सकते हैं ? यहाँ भक्तों के चढ़ावा एवं दान से देवी भगवती के भव्य एवं विशाल मंदिर के साथ – साथ पार्श्व में अन्य कई मंदिर बन चुके हैं। स्थानिय जनप्रतिनिधियों के सहयोग तथा सरकार के प्रयाश से महुआधाम में सड़क, रौशनी, पेयजल, यात्री शेड़, शौचालय, स्नानानागार की थोड़ी व्यवस्था जरूर की गयी है, लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण बुनियादी सुविधायें नाकाफी है। स्थानिय प्रवंध समिति के लोग सिर्फ इस मेला को आमदनी का जरीया मान बैठे हैं, जनहीत की सुविधायें का फीक्र नदारद हैं। आज के वैज्ञानिक युग में जहाँ व्यक्ति चाँद एवं मंगल ग्रह की यात्रा करनें में लगा है । इंटरनेट और गुगल में अपना भविष्य तलाश रहा है, वहाँ महुआ धाम में भूतों का मेला एवं भूतों का उपचार जरा ठहर कर बिचार करनें को मजबुर कर देता है। क्या मेड़िकल साईंस इन रोगों के ईलाज में नकारा सावित हो गया है कि लोग महुआधाम में स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर आते हैं ? या यूँ कहें कि आज भी विज्ञान पर आस्था भारी है । शिक्षा पर अंध विश्वास भारी है। सवाल उठना लाजिमी है। क्या प्रशासन को इस अंधविश्वास पर जागृति फैलाकर रोक लगानी चाहिए ? अगर नहीं, तो महुआधाम में लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए बुनियादी सुविधायें बहाल हर हाल में करना जरूरी है। इसी तरह  औरंगाबाद जिले के मदनपुर के बल्हाबार, रफीगंज के सिहुली, हसपुरा के अमझर शरीफ में नवरात्रा में प्रेत बाधा हेतु भूतों का मेला कुटुम्बा के महुआधाम की तरह ही लगता है।