आलोक कुमार संपादक सह निदेशक ख़बर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में कृषि महाविद्यालय के लिए तीन वर्षों में भी भूमि उपलब्ध सरकार व जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जबकि जिले में चहुंओर पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। सरकार और जिला प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध नहीं कराया गया यह तो जिले के लिए दुर्भाग्य है ही साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों का विफलता व उदासीन

रवैया भी कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। बताते चलें कि भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के आलोक में डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पुसा (समस्तीपुर) के कुलपति डॉ०पुन्यव्रत पाण्डेय ने बिहार सरकार के कृषि सचिव को औरंगाबाद जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने हेतु पत्रांक 323/आर.पी.सी.ए.यू. (वी.सी.) दिनांक 11.05.2023 तथा पत्रांक 524/आर.पी.सी.ए.यू.(वी.सी.) दिनांक 3.11.2023 को पत्र लिखकर भूमि उपलब्ध कराने का मांग किये थे। लेकिन सरकार, जिला प्रशासन के सौतेलापन ब्यवहार ही कहा जा सकता है कि उक्त पत्र को नजरंदाज किया गया है। आश्चर्य तो यह है कि जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी इसके लिए कोई ठोस पहल नहीं कर सके और केवल विकास पूरुष होने का दावा दरबारी मीडिया के माध्यम से करते रहे और सस्ती लोकप्रियता बटोरने का जुगाड करते रहे। जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष का हों या विपक्ष का कोई भी इसके लिए ठोस कदम नहीं उठा सके। जबकि जिले में चहुंओर पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। जिले के कुटुम्बा प्रखंड अंतर्गत कझपा कृषि फार्म में सैंकड़ों एकड़ जमीन है जहां कृषि महाविद्यालय का स्थापना किया जा सकता है इसके अलावा जानकारी के अनुसार जम्होर रेलवे स्टेशन तथा थाना के आस-पास भी सैंकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध है जिसे चिन्हित कर कृषि महाविद्यालय का स्थापना किया जा सकता है। जिले में कृषि महाविद्यालय के स्थापना से न केवल जिले का विकास होगा बल्कि जिले में 75-80 प्रतिशत आबादी जो कृषि पर आधारित है उनका भी चौतरफा विकास होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होगा। अभी तक जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने हेतु मात्र 30एकड भी भूमि उपलब्ध नहीं कराया जाना और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुप्पी जिलावासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय तो है ही साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति गुस्सा और असंतोष व्याप्त है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुप्पी इस बार आने वाले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा भी बनने का प्रबल संभावना दिखाई दे रहा है।