क्या पुलिस कप्तान मीडिया व पीड़ितों के सवालों का जवाब दे पायेंगे? अहम सवाल, न्यायालय आज भी प्राथमिकी के प्रतिक्षा में, आदेश की अवहेलना , 10 माह में भी नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी, क्योंकि थाना अध्यक्ष पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश ,न्यायालय का था

अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात समाचार सेवा

क्या औरंगाबाद जिला के पुलिस कप्तान बिहार प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और कानून मंत्री बता पायेंगे कि 10 माह पहले वर्ष 2025 में राहुल राज थानाध्यक्ष अम्बा थाना के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु अभियोग पत्र संख्या 651/2025 मे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी औरंगाबाद के न्यायालय से पुलिस कप्तान औरंगाबाद के माध्यम से थाना औरंगाबाद को प्राप्त आदेश में आजतक प्राथमिकी

दर्ज क्यों नहीं किया गया और 10 माह से न्याय का आदेश की अवहेलना कैसे होते आ रहा और न्यायालय तथा पुलिस कप्तान औरंगाबाद के आदेश का अवहेलना के लिए जिम्मेदार कौन है,

और आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार थाना अध्यक्ष पर किसी तरह का कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं किया गया तथा आदेश का अनुपालन नहीं करने पर प्राथमिकी आज तक क्यों नहीं दर्ज कराया गया जिम्मेदार पदाधिकारी के नाम और पदनाम क्या है तथा किस थाना में कार्यरत है ?

क्या पुलिस कप्तान यह बता पायेंगे कि न्यायालय द्वारा पुलिस कप्तान को प्राप्त आदेश के आलोक में जिले किस थाना को अम्बा थाना अध्यक्ष राहुल राज पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया था । क्या पुलिस कप्तान बता पाएंगे कि आरोपित थाना अध्यक्ष के बचाव में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने तथा न्यायालय एव पुलिस कप्तान के आदेश का अवहेलना करने वाले संबंधित थानाध्यक्ष पर आजतक कौन सी कार्रवाई की गई है, अगर किसी तरह का कोई कार्रवाई नहीं किया गया है तो आरोपित पुलिसकर्मी की बचाव में पद एवं प्रदत शक्तियों की दुरुपयोग करने वाले थाना अध्यक्ष के विरुद्ध कब और कितने दिनों में प्राथमिकी दर्ज कराया जायेगा और पुलिस महकमे द्वारा घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लगाने के लिए आरोपित थाना अध्यक्ष को समुचित सजा कब तक दिला पायेंगे ?

यह अहम सवाल: पुलिस कप्तान तथा बिहार – सरकार के शासन प्रणाली तथा सरकार द्वारा पीड़ितों को न्याय दिलाने की जबादेही तथा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है ।

अभी तक न्यायालय के आदेश की अवहेलना क्यों हुआ और इसके लिए जिम्मेवार कौन है

यह सर्व विदित सत्य है कि पत्रकार को तबाह करना हो, झूठे मुकदा में जेल भेजना हो तो सभी पुलिस अधिकारी संगठित हो जाते हैं बिना साक्षय व गवाह का पत्रकार एवं उनके परिवार रिश्तेदार एवं समर्थकों के बीच अम्बा थाना में दर्ज सरासर झूठ व मनगढ़ंत मुकदमे को भी सत्य करार दे दिया जाता हैं, जिसकी सुनवाई कहीं पर नहीं होता है और पत्रकार को अपने तथा अपने परिवार , समर्थकों व रिश्तेदार को निर्दोष साबित करने में वर्षा – वर्ष समय बित जाता है, पुलिस द्वारा मनगढ़ंत मुकदमे को झूठा साबित करने में न्यायालय की चक्कर लगाना पड़ता है

वहीं जब पुलिस महकमे पर प्राथमिकी दर्ज करने का बारी आती है तो ….

“सभी साक्षय मौजूद रहने के बावजूद भी” न्यायालय के आदेश के पश्चात भी जनता व पत्रकार के बीच आतंक बन चुके पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध” प्राथमिकी दर्ज नहीं किया जाता है, यदा-कदाअगर किसी मामले में न्यायालय द्वारा थानाध्यक्ष पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पुलिस कप्तान को दिया भी जाता है तो भी थानाध्यक्ष के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने में वर्षो लग जाता है। आखिर क्यों?
यह अहम सवाल देश के कानून, शासन प्रणाली और सरकार के व्यवस्था तथा पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारियों के कर्तव्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देता है।