औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में आरटीआई कानून का नज़र अंदाज़ जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक का कार्यालय से होना एक गंभीर मामला है तथा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है। प्रश्न चिन्ह खड़ा भी होना स्वाभाविक है। जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक जिले के सबसे बड़ा पदाधिकारी होते हैं। अपराध नियंत्रण

तथा विधि ब्यवस्था क़ायम रखना, जिले में विकास का रुप रेखा तय करना तथा मुनेट्रींग करना, लोक स्वतंत्रता व मानवाधिकारों के हिफाजत करने के अलावा अन्य सभी जिम्मेवारी इन्हीं अधिकारियों के पास है। लेकिन जब इनका कार्यकाल से समयानुसार सूचना समय पर आरटीआई कानून के तहत सूचना मांगने वाले को नहीं मिलता है तो क्या यह समझा जाये की आख़िर चुक है या फिर भ्रष्टाचारियों को बचाने अथवा संरक्षण दिया जा रहा है? यदि नहीं तो आखिर समय पर सूचना देने का जिम्मेवार लोगों पर अंकुश लगाने तथा समयानुसार सूचना न देने वाले लोक सूचना पदाधिकारी व अन्य जिम्मेवार लोगों पर समीक्षा कर अब तक कितने लोगों पर कारवाई किया गया है इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। यदि पार्दर्शिता पूर्ण जांच कराया जाये तो यह मामला प्रकाश में आयेगा कि औरंगाबाद जिले में आरटीआई कानून का दमन धड़ल्ले से हो रहा है नतीजतन जिले में अपराध और भ्रष्टाचार का विकास हो रहा है।

