अम्बुज कुमार खबर सुप्रभात सामाचार सेवा
12 सितम्बर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद राजीव रंजन कुमार की अध्यक्षता में उनके प्रकोष्ठ में बैंक ऋण से संबंधित मामलों के निस्तारण के संबंध में विभिन्न बैंकों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल सहित अग्रणी बैंक प्रबंधक, बिहार ग्रामीण बैंक , इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं अन्य बैंकों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजीव रंजन कुमार ने बैंक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए बैंक ऋण से संबंधित अधिकाधिक मामलों को चिन्हित करते हुए उनका आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को त्वरित, सुलभ एवं कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है। अतः बैंक पदाधिकारी इस दिशा में सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों एवं लागू नियमों का पालन करते हुए ऋणधारियों को नियमानुसार अधिकतम संभव राहत प्रदान करने का प्रयास किया जाए। विशेष रूप से वैसे मामलों को प्राथमिकता दी जाए, जिनका आपसी सहमति एवं समझौते के माध्यम से सरलतापूर्वक निस्तारण संभव है। पीडीजे ने यह भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के पूर्व लंबित बैंक ऋण मामलों की समीक्षा कर समझौता योग्य मामलों की सूची तैयार की जाए तथा संबंधित पक्षकारों को समय पर सूचना उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिकाधिक मामलों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से हो सके। बैठक में सरकारी अनुदान से संबंधित बैंक ऋण मामलों में ब्याज लगाने अथवा उसकी वसूली की प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में माननीय पीडीजे द्वारा बैंक पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सरकारी योजनाओं एवं अनुदान से संबंधित मामलों में निर्धारित नियमों एवं स्थापित प्रक्रियाओं का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र ऋणधारियों को नियमानुसार मिलने वाले लाभ से वंचित न होना पड़े। पीडीजे ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में आने वाले पक्षकार अपने विवादों के सौहार्दपूर्ण एवं त्वरित समाधान की अपेक्षा रखते हैं। इसलिए बैंक पदाधिकारी सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बैंक के हितों तथा लागू नियमों के अनुरूप मामलों के निस्तारण की दिशा में प्रभावी प्रयास करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती तान्या पटेल ने भी बैंक पदाधिकारियों से राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक बैंक ऋण मामलों के निस्तारण हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार पक्षकारों को त्वरित, सुलभ एवं निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सचिव ने आम नागरिकों से अपील की कि 12 सितम्बर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण सहित अन्य सुलहनीय मामलों का निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर कराने हेतु अधिकाधिक संख्या में भाग लें। राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित जानकारी अथवा सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद से संपर्क किया जा सकता है।

