औरंगाबाद मंड़ल कारा बना है यातना गृह, स्थापित है इंस्पेक्टर राज, कारा से मुक्त हुए जयप्रकाश ने सुनाया दुखड़ा

औरंगाबाद खबर सुप्रभात सामाचार सेवा


औरंगाबाद जिले का एकमात्र मंड़ल कारा इन दिनों बन चुका है यातना गृह । यहाँ स्थापित है इंस्पेक्टर राज । जेल से दो वर्ष की सजा काट बाहर निकले बंदी जय प्रकाश जी नें बताया कि औरंगाबाद मंड़ल कारा में दबंग बंदियों के द्वारा जेलर की मिली भगत से कैंटिन चलाया जाता है। जहाँ पैसे वाले बंदी को दो हजार रुपया प्रतिमाह कैंटिन संचालक को देकर दो टाईम भोजन करते हैं साथ ही यह सुबिधा लेनें हेतु पाँच सौ रुपये प्रतिमाह जेलर को देना पड़ता है। सरकारी भोजन का स्तर इतना घटिया होता है कि एक बंदी मजबुरी में ही जान बचानें के लिए खा पाता है। एक चोंगा भात और पानी जैसा दाल खाकर ही जीवन की सांस को चालु रखनें को बंदी मजबुर होते है । अगर किसी बंदी नें इसके खिलाफ आबाज उठायी भी तो उसे जेल पुलिस के द्वारा काफी मार – पिटाई की जाती है और यातना गृह (सेल) में डाल दिया जाता है। दुसरी महत्वपूर्ण बात तो यह है कि बाल – दाढ़ी बनबानें के एवज में एक सौ रुपया नगद लिया जाता है । नहीं देनें पर आदी -मानव की शक्ल में लंबी दाढ़ी एवं लम्बे बाल वाला बनना पड़ता है। औरंगाबाद मंड़ल कारा में प्रतिबंधित नशा का सामान गाँजा, विड़ी, खैनी, गुटका, शराब भी काफी ऊँच्चे दामों पर धड़हल्ले से बेचे जाते हैं। जब भी कोई वरीय अधिकारियों का जेल निरीक्षण होना होता है तो जेल पुलिस एवं इंस्पेक्टर द्वारा सारे बंदियों को घमकी दिया जाता है कि कोई शिकायत यदि करोगे तो अंजाम बुरा होगा – मार पिटाई एवं सेल के लिए तैयार रहना । नतीजन बंदीगण निरीक्षी पदाधिकारी के समझ या तो चुप ही रहते हैं या फिर सब ठीकठाक है कि स्वीकृति देनें को मजबुर होते हैं। हाल ही में मंडल कारा से मुक्त होने के बाद जयप्रकाश पासवान ने उक्त बातें खबर सुप्रभात से साझा कर जानकारी दी है।