औरंगाबाद खबर सुप्रभात समाचार सेवा
औरंगाबाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिसियप थाना में पदस्थापित एसआई (दारोगा)उमेश कुमार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया वहीं जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। दारोगा उमेश कुमार के द्वारा रिश्वत मांगे जाने का शिकायत तेंदुआ गणपत गांव निवासी डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी विभाग से की थी। उनका आरोप था कि एक आपराधिक मामले में सहयोग करने के नाम पर उनसे लगातार रिश्वत की मांग कर रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 14 जुलाई को गांव में नाली-गली के पुराने विवाद को लेकर हुई मारपीट में डॉ. लक्ष्मण राम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तब उन्हें डायल-112 की टीम अस्पताल ले गई थी। इसी घटना को लेकर दूसरे पक्ष की ओर से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी रिसियप थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी दारोगा उमेश कुमार को सौंपी गई थी। आरोप है कि जांच के दौरान दारोगा उमेश कुमार ने केस में राहत देने के बदले पहले 1.50 लाख रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के बाद 1 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। तय योजना के अनुसार 50 हजार रुपये पहले और शेष 50 हजार रुपये बाद में देने थे। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि आरोपी अधिकारी अक्सर मिलने बुलाकर नारियल पानी, पेड़ा और आम जैसी चीजें भी मंगवाते थे। इस बीच डॉ. लक्ष्मण राम ने पूरे मामले की शिकायत निगरानी विभाग से कर दी। शिकायत का सत्यापन होने के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और पहली किस्त के 50 हजार रुपये लेते ही दारोगा उमेश कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को निगरानी विभाग अपने साथ लेकर गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। दारोगा उमेश कुमार को निगरानी के हत्थे चढने से जहां जिले में पुलिस ब्यवस्था पर सवाल उठ रहा है वहीं गुड़ पुलिसिंग का दावा तार -तार हुआ है।
