डीके अकेला की रिपोर्ट
बिहार राज्य के प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि उच्च जातियों के लिए बिहार राज्य चुनाव आयोग की अनुशंसा नहीं मिलने के कारण ही *भूमिहार ब्राह्मण * लिखने का निर्णय लेना बिल्कुल ही अनुचित है। सभी सरकारी दस्तावेज, अभिलेखों और प्रपत्रों मेंभूमिहार ब्राह्मण लिखने पर घोर आपत्ति जताई गई है और यह कहा गया कि ऐसे भ्रमित करने वाले शब्दों पर तत्काल प्रभाव से रोक शीघ्र लगाई जाए। कल शुक्रवार को विधानसभा में ही बीजेपी पार्टी के जिवेश कुमार की एक ध्यानाकर्षण सूचना का सरकार की तरफ से जबाव दे रहे थे। प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि उच्च जातियों के लिए राज्य आयोग ने हिंदू समुदाय में मात्र ब्राह्मण राजपूत, भूमिहार और कायस्थ का ही जिक्र किया गया है तो फिर यह भूमिहार ब्राह्मण कहां से आ टपका ? आसमान से या कोई पेड़ पौधा से और ये किस खेत की मूली,उपज है ? आयोग ने पिछले साल ही भूमिहार ब्राह्मण लिखने पर चर्चा की, लेकिन सरकार के पास कोई अनुशंसा नहीं अब तक भेजी है। मंत्री के अनगढ़ व लंपटई जबाव से असंतुष्ट नेताओं में जीवेश कुमार समेत कई विधायक सदन में खड़े हो गए एवं सब जबर्दस्त हंगामा करने लगे। सत्ता पक्ष यानी भाजपा के ही तरारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विशाल प्रशांत ने तो सरकार पर जबर्दस्त तंज कस कर कहा कि भूमिहार को क्यों नहीं एसटी में शामिल कर दिया जाता है ? ना रहे बांस और नहीं बाजे बांसुरी।सदन में बढ़ते हंगामे के मद्देनजर विधानसभा अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही दिन के दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
मंत्री का तर्क या कुतर्क : प्रभारी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार सदन में आगे यह भी बता दी कि आयोग को अनेकों अभ्यावेदकों ने यह भी साग्रह अनुरोध किया कि अब से सभी सरकारी दस्तावेजों , अभिलेखों और प्रपत्रों में भूमिहार जाति को केवल यानी मात्र भूमिहार के रूप में ही अंकित करने का निर्देश दिया जाए।
ज्ञात हो कि आयोग ने अब तक किसी भी जाति का नाम परिवर्तन नहीं किया है। प्रभारी मंत्री ने सदन को बताया कि उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग के दस्तावेज में इससे पहले किसी भी जाति का नाम परिवर्तन करने की चर्चा तक कहीं भी नहीं है। आयोग द्वारा इस तरह की कोई भी अनुशंसा से इसके पहले नहीं की गई है।
- भूमिहार ब्राह्मण * नाम दर्ज करने का प्रस्ताव बिहार सरकार के चौखट पर वेवश, लाचार एवं विचाराधीन कैदी के बतौर दम तोड़ने को मजबूर हैं। भाजपा विधायक निवेश कुमार ने ध्यानाकर्षण सूचना व प्रस्ताव में कहा है कि राज्य सरकार के भू -राजस्वयू जब के दस्तावेजों,विभिन्न विभाग के शासकीय अभिलेखों में तो संबंधित जाति का नाम केवल भूमिहार ब्राह्मणही अंकित है । वर्तमान परिस्थिति में बिहार सरकार की जाति सूची और जाति प्रमाण-पत्रों में सिर्फ भूमिहार किए जाने के कारण अभिलेखीय विसंगति एवं भारी भरकम भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संदर्भ में संबंधित व्यक्तियों व सामाजिक संगठनों द्वारा राज्य सरकार के समक्ष आवेदन पत्र समर्पित किए गए हैं।1931 के जनगणना रिपोर्ट तथा राजस्व विभाग के तमाम भू अभिलेख दिया गया है, जिसमें जाति का नाम*भूमिहार ब्राह्मण * ही तो अंकित है।सामान्य प्रशासन विभाग के 23 जून 2026 के पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट व साफ कर दिया गया है कि भूमिहार के स्थान पर** भूमिहार ब्राह्मण* अंकित किए जाने का मामला बिहार सरकार के समक्ष विचाराधीन पेंडुलम की तरह ही डोलड्रम की स्थिति में पड़े व खड़े हैं। यह उभरता संवेदनशील संगीन मामला सरकार के गले में ऐसा जा फंसा है कि नहीं तो उसे अब निगलने या उगलने में बन रहा है। उहापोह की स्थिति में भवर काटती नजर आ रही है।
