मंडलकारा नवादा में विचाराधीन कैदी के मौत में जेल अधीक्षक व जेलर पर प्राथमिकी एवं सिपाही निलंबित

नवादा से डीके अकेला की रीपोर्ट


नवादा जिले के अंतर्गत मंडल कारा में 20 वर्षीय विचाराधीन बंदी घन श्याम कुमार उर्फ दुलार चंद उर्फ घनश्याम चौहान की फांसी लगाकर हुई आत्महत्या का मामला काफी गंभीर होता जा रहा है। घटना के दिन बुधवार को ही(FSL) फॉरेंसिक टीम जेल पहुंच कर घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण किया और कई अहम साक्ष्य को जुटाए। दूसरी तरफ शुरुआती जांच में ड्यूटी के दौरान घोर लापरवाही पाए जाने पर जेल प्रशासन ने एक सिपाही नीतीश कुमार को जनाक्रोश को शांत व ठंढा करने के उद्देश्य से बलि का बकरा बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब पूरे मामले का विभागीय जांच साथ पुलिस और फॉरेंसिक एफएसएल की जांच भी जारी है। अब उक्त संवेदनशील मामले ने नया मोड़ अख्तियार कर लिया है। मंडल कारा में विचाराधीन बंदी घनश्याम चौहान के मौत के मामले में एक नया मोड़ सामने चौंकाने वाला आ गया है। मृतक के पिता रघु चौहान के आवेदन पर नगर थाना में कांड संख्या 753/26 दर्ज किया गया है।प्राथमिकी में जेल अधीक्षक,जेलर व कक्षपाल समेत ड्यूटी में तैनात अन्य सिपाही को भी नामजद आरोपित बनाया गया है। परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही बरतने का संगीन आरोप लगाते हुए उचित कानूनी कारवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृतक के परिजनों ने सीधे जेल प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारियों पर सुनियोजित हत्या का आरोप लगाया। थाना क्षेत्र के महाराजवान निवासी रघु चौहान व माता फूलवंती देवी एवं परिजनों ने सीधे जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों ने बताया कि मंगलवार को हमलोग अपने बेटे से मिलने जेल गए थे।उस दिन मेरा बेटा बिल्कुल ठीक तथा पूर्ण स्वस्थ्य था।अचानक अगले ही दिन फांसी लगाकर कैसे मर सकता है ? यह बेहद विचारणीय मामला है।
मृतक के परिजनों ने संगीन गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके बेटे की जेल के अंदर जेल प्रशासन द्वारा प्रायोजित तरीके से की गई विशुद्ध हत्या है। परिजनों में इस बात को भी लेकर भारी आक्रोश है कि उक्त संवेदनशील घटित घटिया घटना के बाद भी कोई वरिष्ठ जेल अधिकारी या जेल अधीक्षक सदर अस्पताल नवादा नहीं पहुंचे।मृतक के परिजनों ने बताया कि जेल परिसर में CCTV कैमरे लगे हैं तो पूरी घटना उसमें दर्ज क्यों न हुई ? इसके अलावा कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद भी जेल के अंदर ही पुलिस की निगरानी में किसी बंदी द्वारा फंदा लगाने की बात पर भी सुरक्षा व्यवस्था मूक मुंहवाये कठघरे में खड़ी है।मृतक के स्वजनों का रो-रो कर बहुत बुरा हाल हो गया है। परिजनों ने उक्त घटना की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। यदि बंदी पास वार्ड की चाबी पहुंची तो आखिर कैसे पहुंची ? चाबी छीन ली गई थी या मेल से दे दी गई थी ? यह यक्ष प्रश्न सबों के दिलोदिमाग में कौंध रहा है।प्रतिबंधित क्षेत्र की चाबी आखिर घन श्याम के पास कैसे पहुंची ? निगरानी व्यवस्था में चूक कैसे व कहां हुई? क्या ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों ने समय रहते स्थिति पर पूर्ण ध्यान नहीं दिया ? ऐसे कई सवालों के जवाब पुलिस जांच में तलाश रही है। ऊपर छत वाले वार्ड में सीढ़ी के रेलिंग से झूलता मिला मृतक घनश्याम का शव। बुधवार को दोपहर लगभग तीन बजे मंडलकारा के अंदर जबर्दस्त अफरा – तफरी मच गई,जब विचाराधीन कैदी घनश्याम चौहान के फांसी के फंदे से लटके होने की सूचना सिपाही द्वारा मिली।यह सनसनीखेज खबर जेल के साथ पूरे जिले में दावानल की तरह फैल गया।जेल कर्मियों ने तत्काल उसे फांसी के फंदे से नीचे उतारा और जेल में मौजूद चिकित्सकों की टीम ने उसकी जान बचाने के लिए सीपीआर दिया।हालत और गंभीर होने पर उसे एंबुलेंस से सदर अस्पताल नवादा भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांचोपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कि शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि घटना के समय मृतक किसी तरह ड्यूटी पर तैनात सिपाही के ऊपर वाले वार्ड के मुख्य गेट की चाबी ले ली थी अथवा सिपाही ने मिलीभगत से चाबी दे दी ? यह तो गंभीर जांच का विषय बन गया है। इसके बाद वह ऊपर वाले वार्ड में सीढ़ी चढ़ने वाले गेट के अंदर से दरबाजा बंद कर लिया और सीढ़ी की रेलिंग में गमछा का फंदा लगाकर कर झूल गया।जब काफ़ी देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो जेल कर्मियों को कुछ संदेह हुआ। सूचना मिलते ही दरबाजा खोलने का प्रयास किया गया, लेकिन अंदर से बंद होने के कारण गेट को काटकर वार्ड में प्रवेश करना पड़ा।अंदर पहुंचने पर घनश्याम फांसी के फंदे से लटका मिला।तत्काल उसे नीचे उतारकर उपचार शुरू किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
विदित हो कि उक्त मामले की एक और महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि मृतक घनश्याम के अपने सहोदर भाई गुड्डू चौहान भी मंडल कारा नवादा न्यायिक हिरासत में बंद है। वह मेसकौर थाना कांड संख्या 228/25 का अभियुक्त है। वहीं मृतक के अपने चाचा गुरुदेव चौहान पिता लखन चौहान भी उसी सामूहिक दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में अभियुक्त है जो फिलहाल नवादा मंडलकारा में बंद हैं।एक परिवार के तीन सदस्यों एक ही जेल में बंद होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। घनश्याम चौहान भी पॉक्सो एक्ट में जेल में बंद था।
जांचोपरांत यह भी बात सामने आया है कि घटना के दिन मृतक की मां फूलवंती देवी मंडल कारा अपने बेटे से मुलाकात करने के लिए सुबह 9.45 में पहुंची थी। उन्होंने घनश्याम चौहान से मुलाकात कर हाल चाल के बारे में पूछताछ की।इस तथ्य को भी जांच का एक हिस्सा बनाया गया है।जेल अधीक्षक ने कहा कि इस मुलाकात के बाद ऐसा क्या हुआ ? यह तो जांच का ही मामला है और इस घटना के बीच किसी प्रत्यक्ष प्रमाण या संबंध है या नहीं ? इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
घटना के बाद जेल प्रशासन ने प्रथम दृष्टया सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक तथा घोर लापरवाही मानते हुए ड्यूटी पर तैनात सिपाही नीतीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी और अन्य जेल कर्मी की भूमिका या लापरवाही बरतने का मामला सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कानूनी कारवाई की जाएगी। बुधवार को ही एफएसएल की टीम मंडल कारा नवादा पहुंची और उस वार्ड, सीढ़ी,रेलिंग व अन्य स्थानों का गहन व सघन निरीक्षण किया, जहां घटना हुई थी। टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। इसके अलावा पुलिस टीम घटना स्थल से सीसीटीवी फुटेज , ड्यूटी रजिस्टर चाबी के रखरखाव की व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात सिपाही से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना तक पहुंचने वाली परिस्थितियां क्या थीं और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां व कैसे हुई ? यह जांच वारसलीगंज के सर्कल पुलिस निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार को दी गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।नगर थाना पुलिस ने केस की प्रक्रिया के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम के लिए शव पटना भेजा जा चुका है। अब पोस्ट मार्टम रिपोर्ट, FSL रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और विभागीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर आगे की करवाई निर्धारित की जाएगी।यह घटना न केवल नवादा मंडल कारा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है,अपितु यह भी संदेश व संकेत देती है कि बिहार के सभी जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावी समीक्षा की आवश्यकता है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला केवल सुरक्षा में लापरवाही बरतने का था या इसके पीछे छिपे अन्य परिस्थितियां भी जिम्मेदार थीं।