आर्ची ने किया अपने दादा जी का श्राद्धकर्म, रूढ़ परंपराएं तोड़ कर आगे आ रही है बेटियाँ
नवादा से गौरी विश्वकर्मा का रिपोर्ट बेटियाँ जब ठान लेती है तो रूढ़ से रुढ़तम परंपराएं भी टूट कर बिखरने लगती है । अब तक बेटियों को अर्थियां उठाने , श्मशान घाट तक जाने और मुखाग्नि देने की वैदिक प्रतिबन्ध को टूटते देखा था किन्तु अब तपस्विनी कर्ता बनकर उतरी लेने और 13 दिनों तक
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